तरु छाया रेजिडेंसी में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, पहले दिन भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का दिया संदेश
पंडित अशोक व्यास बोले- भागदौड़ भरी जिंदगी में ईश्वर की भक्ति के लिए भी समय निकालें, पितृ पक्ष में दान-पुण्य का विशेष महत्व
डीडवाना : तरु छाया रेजिडेंसी परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ धार्मिक वातावरण और श्रद्धा के साथ हुआ।
कथा के प्रथम दिवस पर व्यास पीठ से पंडित अशोक व्यास ने श्रीमद्भागवत के महत्व, भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य और पितृ पक्ष में दान-पुण्य के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
पंडित अशोक व्यास ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा समस्त पुराणों का सार है, जिसमें भगवान श्रीमन नारायण के विभिन्न अवतारों का वर्णन मिलता है। भगवान विष्णु ने अपने अलग-अलग अवतारों में आसुरी शक्तियों का विनाश कर धर्म की स्थापना की। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य को आध्यात्मिक शांति और सद्मार्ग की प्रेरणा देता है तथा जीवन को धर्म और भक्ति से जोड़ता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने आर्थिक और सांसारिक कार्यों के लिए दिन-रात भागदौड़ करता रहता है, लेकिन ईश्वर की भक्ति के लिए उसके पास समय नहीं होता। जब तक उसे भक्ति का महत्व समझ में आता है, तब तक कई बार बहुत देर हो चुकी होती है। इसलिए भागदौड़ भरी जिंदगी में भी मनुष्य को ईश्वर की आराधना के लिए समय निकालना चाहिए। जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान की भक्ति करता है, भगवान उसकी रक्षा करते हैं।
राजा परीक्षित को सुनाई गई थी पहली भागवत कथा
पंडित व्यास ने श्रीमद्भागवत कथा की महिमा बताते हुए कहा कि राजा परीक्षित को शुकदेव मुनि ने भागवत कथा का श्रवण कराया था। इस कथा के श्रवण के लिए विभिन्न लोकों के जीव-जंतु, नाग, किन्नर और अनेक प्रकार के पशु-पक्षी भी उपस्थित हुए थे। कथा का मूल उद्देश्य मनुष्य को ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ाना है।

उन्होंने कहा कि तरु छाया रेजिडेंसी के सभी निवासी भाग्यशाली हैं कि उन्हें अपने क्षेत्र में इस प्रकार के धार्मिक अनुष्ठान के आयोजन का अवसर मिला है। सभी को कथा श्रवण में भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त करना चाहिए और अपने जीवन में धार्मिक संस्कारों को अपनाना चाहिए।
पितृ पक्ष में दान-पुण्य का विशेष महत्व
वर्तमान में चल रहे पितृ पक्ष की महत्ता बताते हुए पंडित अशोक व्यास ने कहा कि पितृ पक्ष पूर्वजों के स्मरण, श्रद्धा और उनके निमित्त दान-पुण्य करने का विशेष अवसर है। इस अवधि में किए गए धार्मिक और पुण्य कार्यों का विशेष महत्व माना गया है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और उनके निमित्त किए गए दान-पुण्य से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की भावना मजबूत होती है।
शिव मंदिर से निकली शोभायात्रा, महिलाओं ने किया नृत्य
श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ से पूर्व सोसायटी परिसर स्थित भगवान शिव मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा सोसायटी के मुख्य द्वार से प्रवेश करते हुए कथा स्थल पर पहुंची। इस दौरान सोसायटी के महिला-पुरुषों ने गाजे-बाजे के साथ नृत्य करते हुए धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का परिचय दिया।
कथा के प्रथम दिवस पर विधि-विधान के साथ मुख्य यजमान के रूप में सोसायटी अध्यक्ष नवनीत जीनगर एवं तेजकरण व्यास ने अपनी-अपनी धर्मपत्नियों के साथ पूजन किया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान सोसायटी का वातावरण भक्तिमय बना रहा और श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
