कुचामन न्यायालय में वकीलों का धरना जारी, जिला न्यायाधीश ने बुलाकर की वार्ता — समाधान का दिलाया भरोसा

कुचामन सिटी। न्यायालय परिसर में मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर कुचामन अभिभाषक संघ का धरना सोमवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। भीषण गर्मी में ‘ओपन चैंबर’ में बैठने को मजबूर अधिवक्ताओं का आक्रोश अब प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इसी बीच मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीडवाना-कुचामन नाहर सिंह मीणा ने अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए डीडवाना बुलाया।

बार संघ अध्यक्ष दिनेश सिंह राठौड़ के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद शर्मा, भंवरा राम ल्योरा, रमेश चौधरी और ओमप्रकाश पारीक ने जिला न्यायाधीश से मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट कहा कि न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के लिए न तो धूप से बचाव की व्यवस्था है और न ही बारिश से संरक्षण के लिए कोई शेड, जिसके कारण उन्हें अत्यंत प्रतिकूल और अमानवीय परिस्थितियों में काम करना पड़ रहा है।अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार मांग रखने के बावजूद कोई स्थाई समाधान नहीं किया गया। यहां तक कि जब अधिवक्ताओं ने स्वयं अस्थाई शेड लगाने का प्रयास किया, तो उसे भी रोक दिया गया।

इस दौरान अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुंदरलाल खारोल के व्यवहार को लेकर भी अधिवक्ताओं ने नाराजगी जताई और असहयोगात्मक रवैए का आरोप लगाया।धरने के बीच जिला एवं सत्र न्यायाधीश नाहर सिंह मीणा ने पूरे मामले को गंभीरता से सुनते हुए अधिवक्ताओं की समस्याओं के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने आश्वस्त किया कि वे मंगलवार को स्वयं सीजेएम के साथ न्यायालय परिसर का निरीक्षण करेंगे और अभिभाषक संघ के साथ बैठक कर समाधान निकालेंगे।

क्या बोले बार संघ अध्यक्ष दिनेश सिंह राठौड़?

बार संघ अध्यक्ष दिनेश सिंह राठौड़ ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उस लापरवाह व्यवस्था के विरोध में है, जिसने अधिवक्ताओं को खुले आसमान के नीचे काम करने के लिए मजबूर कर दिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि जल्द ही ठोस और संतोषजनक समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी न्यायालय प्रशासन की होगी।उन्होंने यह भी बताया कि अभिभाषक संघ ने फिलहाल 21 अप्रैल को भी धरना जारी रखने का निर्णय लिया है। मंगलवार को जिला न्यायाधीश के निरीक्षण और वार्ता के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।

धरना स्थल पर सोमवार को बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे और सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगों को दोहराया। वरिष्ठ अधिवक्ता महेन्द्र पारीक, प्रेम सिंह बीका, रतनलाल प्रधान, मुरलीधर जोशी, अनिल कुमावत, राजेंद्र कुमावत, विनोद सिंह, ओमेंद्र सिंह, यज्ञदत्त रिणवा, सुधीर कौशिक, अर्जुन कुमावत, मुकेश घंसवा, दिलावर खान सहित महिला अधिवक्ता सुनीता सैनी, प्रियंका पारीक, कोमल पारीक और मोनिका चौधरी भी धरने में शामिल रहीं।

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