डीडवाना-कुचामन जिले के कुचामन सिटी में अफोर्डेबल हाउसिंग योजना के तहत घर का सपना देख रहे करीब 800 परिवारों का इंतजार अब आक्रोश में बदल चुका है। 15-16 साल पहले मकान के पट्टे मिलने और पूरी राशि जमा करने के बावजूद आज तक लोगों को अपने घर नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में पीड़ितों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए उपखंड अधिकारी विश्वामित्र मीणा को ज्ञापन सौंपकर जल्द समाधान की मांग की है।

दरअसल, कुचामन सिटी के त्रिसिंग्या हनुमानपुरा क्षेत्र में वर्ष 2011 में अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी 2009 के तहत यह परियोजना शुरू की गई थी। इस योजना को पीपीपी मॉडल पर नगर पालिका मंडल कुचामन सिटी और श्रीराम बालाजी डेवलपर्स एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित किया जाना था। योजना के तहत आवेदन लेकर लोगों से निर्धारित राशि जमा करवाई गई और लॉटरी के माध्यम से आवंटन भी कर दिया गया, लेकिन 16 साल बीत जाने के बाद भी योजना अधूरी पड़ी है।
इसको लेकर अपनी मेहनत की कमाई के लाखों रुपए पैसे जमा कर चुके लोगों में भारी असंतोष है।

योजना के तहत आर्थिक कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 325 वर्गफीट के 496 फ्लैट 2.40 लाख रुपए में, अल्प आय वर्ग (LIG) के लिए 500 वर्गफीट के 288 फ्लैट 3.75 लाख रुपए में तथा मध्यम आय वर्ग (MIG) के लिए 700 वर्गफीट के 96 फ्लैट 7 लाख रुपए में बनाए जाने थे। तय समय सीमा 300 दिन रखी गई थी, लेकिन आज तक न तो निर्माण पूरा हुआ और न ही किसी को कब्जा दिया गया।
पीड़ितों का आरोप है कि कई फ्लैट अधूरे हैं और जो बने हैं वे भी जर्जर हालत में हैं। घटिया निर्माण सामग्री और खारे पानी के उपयोग के कारण फ्लैट रहने लायक नहीं बचे हैं। लोगों ने करोड़ों रुपए के गबन के भी आरोप लगाए हैं।

इसे लेकर बड़ी संख्या में कुचामन उपखंड कार्यालय पहुंचे पीड़ितों ने उपखंड अधिकारी विश्वामित्र मीणा को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और जमा राशि ब्याज सहित वापस दिलाई जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द सुनवाई नहीं हुई तो वे धरना-प्रदर्शन और सड़क जाम करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने जीवनभर की जमा पूंजी इस उम्मीद में लगाई थी कि कुछ वर्षों में अपना घर मिल जाएगा, लेकिन वर्षों से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं। कई परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं और लगातार प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं।

उपखंड अधिकारी विश्वामित्र मीणा ने बताया कि पीड़ितों द्वारा ज्ञापन दिया गया है, जिसमें मकान के पट्टे जारी होने और पूरी राशि जमा होने के बावजूद घर नहीं मिलने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
