कुचामन सिटी। कुचामन सिटी स्थित श्री कुचामन गौशाला बीड़ में आगामी 13 से 19 अक्टूबर 2026 तक सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। सीतादेवी सत्यनारायण काबरा सत्संग भवन में आयोजित होने वाले इस धार्मिक आयोजन में यशोदावतार संत श्री श्रीजीबाबा महाराज के सुपुत्र एवं ब्रजभक्त आचार्य श्री रमाकान्त गोस्वामी जी भागवत कथा का वाचन करेंगे।
आयोजक मुकेश कुमार काबरा ने बताया कि कथा का आयोजन प्रतिदिन दो सत्रों में होगा। प्रातः 9:30 से दोपहर 12:30 बजे तथा सायं 4 से 6 बजे तक श्रद्धालु श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर सकेंगे।

आयोजक बसंत कुमार ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का आयोजन 13 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक सीतादेवी सत्यनारायण काबरा सत्संग भवन, श्री कुचामन गौशाला बीड़, कुचामन सिटी में होगा। कथा का समय प्रातः 9:30 से 12:30 बजे और सायं 4 से 6 बजे तक निर्धारित किया गया है।
आयोजक काबरा परिवार ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण एवं धार्मिक आयोजन का लाभ लेने की अपील की है।
22वीं पीढ़ी से कथा वाचन की परंपरा
गौरतलब है कि आचार्य श्री रमाकान्त गोस्वामी पुष्टिमार्गीय परंपरा से जुड़े हुए हैं और उनके परिवार में कई पीढ़ियों से कथा वाचन एवं ठाकुरजी की सेवा की परंपरा चली आ रही है। उनके अनुसार वे इस परंपरा की 22वीं पीढ़ी में कथा वाचन कर रहे हैं। उनके पिता एवं संत श्री श्रीजीबाबा महाराज ने भी जीवन में लगभग 1500 कथाओं का वाचन किया।
आचार्य रमाकान्त गोस्वामी ने बी.एससी., एम.ए., एलएल.बी., ज्योतिषाचार्य, साहित्याचार्य एवं वेदान्ताचार्य सहित विभिन्न शैक्षणिक एवं आध्यात्मिक उपाधियां प्राप्त की हैं। उन्होंने 1 अप्रैल 1994 से भागवत कथा वाचन प्रारंभ किया और अब तक 520 भागवत कथाओं का वाचन कर चुके हैं। कुचामन में आयोजित होने वाली कथा उनके जीवन की 521वीं कथा होगी। इसके अलावा वे शिवपुराण, रामकथा, भक्तमाल एवं देवी भागवत सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों की कथाओं का वाचन भी करते हैं।

आचार्य रमाकान्त गोस्वामी ने बताया कि उनके पिता श्री श्रीजीबाबा महाराज ने कथा वाचन से प्राप्त राशि को व्यक्तिगत उपयोग के बजाय समाज, शिक्षा, चिकित्सा और धार्मिक सेवा कार्यों में लगाने की प्रेरणा दी। इसी भावना के तहत विद्यालयों, आश्रमों एवं चिकित्सालयों की स्थापना के साथ ब्रज चौरासी कोस के तीर्थ स्थलों के संरक्षण और विकास का कार्य किया गया।
उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को संस्कार, सेवा, सद्भाव और मानवता से जोड़ने का माध्यम है। कथा श्रवण से व्यक्ति को जीवन के मूल्यों को समझने, अपने आचरण में सकारात्मक परिवर्तन लाने और सेवा भाव को मजबूत करने की प्रेरणा मिलती है। कथा से प्राप्त सहयोग का उपयोग यदि शिक्षा, चिकित्सा, गौसेवा, संतसेवा और तीर्थ संरक्षण जैसे कार्यों में किया जाए तो इसका लाभ व्यापक समाज तक पहुंचता है।
ब्रज के तीर्थों के संरक्षण में भी सक्रिय
श्री रमाकान्त गोस्वामी का जीवन सनातन धर्म के तीर्थों और धार्मिक ग्रंथों की सेवा को समर्पित रहा है। मुंबई निवासी श्री विश्वनाथ चौधरी की अध्यक्षता में ब्रज विकास ट्रस्ट का गठन कर ब्रज क्षेत्र के करीब 100 कुंड, सरोवर, वन, उपवन एवं मंदिरों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का कार्य कराया गया है। वर्तमान में भी ब्रज के अनेक प्राचीन मंदिरों में जीर्णोद्धार एवं संरक्षण का कार्य जारी है।

श्री गिरिराजजी की बड़ी परिक्रमा मार्ग में ‘श्रीजीबाबा की हवेली’ नाम से एक आश्रम की परिकल्पना भी की गई है। यहां श्री बालकृष्ण प्रभु एवं श्री श्रीजीबाबा (श्रीनाथजी) के मंदिर, गौशाला, वैष्णवों के ठहरने की व्यवस्था, महाप्रसादम् भोजनालय एवं धार्मिक उत्सवों के लिए सभागार सहित विभिन्न सुविधाएं विकसित की गई हैं। यहां ठाकुरजी सेवा, गौसेवा, संतसेवा, ब्राह्मण सेवा एवं अतिथि सेवा का संचालन किया जा रहा है।
आयोजक मनोज काबरा ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। कथा में शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। उन्होंने बताया कि कथा दो समय आयोजित होगी, ताकि श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार कथा का श्रवण कर सकें।

मनोज काबरा ने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि वे परिवार सहित कथा स्थल पर पहुंचें और आचार्य श्री रमाकान्तजी गोस्वामी के मुखारविंद से भागवत कथा का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि आयोजन का उद्देश्य धार्मिक वातावरण के साथ समाज में संस्कार, सेवा और सनातन परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
इस मौके पर ओमप्रकाश काबरा, सुभाष रांवका, अशोक मंत्री, ललित काबरा सहित काबरा परिवार के सदस्य मौजूद रहें।
