कुचामन : चेक अनादरण के दो मामलों में विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट का अहम फैसला



4 लाख रुपये के भुगतान से जुड़े मामले में नरेश कुमार अग्रवाल दोषसिद्ध, दो मामलों में एक-एक वर्ष का साधारण कारावास


कुचामन सिटी। चेक अनादरण के दो अलग-अलग मामलों में विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (चेक अनादरण प्रकरण) दुष्यंत गुर्जर ने अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी नरेश कुमार अग्रवाल पुत्र गोविंदलाल, निवासी भोपजी वालों की गली, कुचामन सिटी को दोषसिद्ध किया है। न्यायालय ने दोनों मामलों में अर्थदंड के साथ एक-एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है।


4 लाख रुपये के बदले जारी किए थे दो चेक


प्रकरण के अनुसार परिवादी गौरव नागर पुत्र सुधीर कांत नागर, निवासी बी.आर. खोखर स्कूल के पास, कुचामन सिटी ने बताया कि नरेश कुमार अग्रवाल ने उनसे कुल 4 लाख रुपये उधार लिए थे। उधार राशि के भुगतान के लिए आरोपी ने दो चेक जारी किए थे। इनमें एक चेक 1 लाख रुपये तथा दूसरा 3 लाख रुपये का था।
परिवादी ने दोनों चेक भुगतान प्राप्त करने के लिए अपने बैंक खाते में जमा करवाए। आरोप है कि चेक जारी करने के बाद आरोपी ने चेक का भुगतान रुकवा दिया, जिसके चलते बैंक द्वारा दोनों चेक बिना भुगतान के वापस कर दिए गए।
इसके बाद परिवादी की ओर से आरोपी को चेक अनादरण की सूचना देते हुए नियमानुसार नोटिस भेजा गया, लेकिन नोटिस दिए जाने के बावजूद उधार ली गई राशि का भुगतान नहीं किया गया।


अधिवक्ता के जरिए न्यायालय में दर्ज कराया था परिवाद


चेक का भुगतान नहीं होने के बाद परिवादी गौरव नागर ने अपने अधिवक्ता ओमप्रकाश पारीक के माध्यम से परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 एवं 142 के तहत न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया।
मामले में दोनों पक्षों की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। साक्ष्य पूर्ण होने के बाद न्यायालय ने दोनों पक्षों की बहस सुनी और खुले न्यायालय में फैसला सुनाया।


एक लाख के चेक पर 1.50 लाख और तीन लाख के चेक पर 4.55 लाख रुपये प्रतिकर


न्यायालय ने 1 लाख रुपये के चेक वाले मामले में आरोपी को दोषसिद्ध करते हुए 1 लाख 50 हजार रुपये प्रतिकर के रूप में अदा करने का आदेश दिया। साथ ही इस मामले में एक वर्ष का साधारण कारावास सुनाया गया।
वहीं 3 लाख रुपये के चेक वाले दूसरे मामले में न्यायालय ने 4 लाख 55 हजार रुपये प्रतिकर के रूप में अदा करने का आदेश देते हुए एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई।
न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि निर्धारित प्रतिकर राशि अदा नहीं करने की स्थिति में आरोपी को दोनों मामलों में अलग-अलग 15-15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।


एडवोकेट ओमप्रकाश पारीक ने ये कहा?


परिवादी की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता ओमप्रकाश पारीक ने बताया कि चेक जारी किए जाने के बाद भुगतान रोक दिए जाने के कारण दोनों चेक अनादरित हुए थे। परिवादी की ओर से कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए नोटिस दिया गया और न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया।

उन्होंने कहा कि न्यायालय ने दोनों पक्षों की साक्ष्य एवं बहस सुनने के बाद आरोपी को दोषसिद्ध करते हुए दोनों मामलों में सजा और प्रतिकर की राशि निर्धारित की है।
उन्होंने बताया कि इस फैसले में न्यायालय ने चेक अनादरण से जुड़े मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत परिवादी के पक्ष को स्वीकार करते हुए आदेश पारित किया है।

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