कुचामन सिटी। हनुमानपुरा स्थित कड़वा की ढाणी में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पांडाल में बुधवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान बांके बिहारी की मनोहारी झांकी, भव्य सजावट और भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कथा व्यास एवं राष्ट्रवादी विचारक परम पूज्य आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज (जयपुर) ने श्रीमद्भागवत महापुराण के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति एवं संस्कारों का संदेश दिया। उन्होंने राजा परीक्षित को प्राप्त श्राप के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को क्रोध, अहंकार और अविवेक से दूर रहकर सदैव धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली दिव्य ज्ञानगंगा है।

कथा के दौरान माता अनुसूया जी के आदर्श चरित्र और पतिव्रत धर्म की महिमा का वर्णन किया गया। वहीं सती चरित्र के माध्यम से माता सती के त्याग, समर्पण और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा का भावपूर्ण चित्रण प्रस्तुत किया गया।
कथावाचन के द्वितीय दिवस का प्रमुख आकर्षण भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाह प्रसंग का वर्णन रहा। आचार्य श्री ने भगवान शिव की अलौकिक बारात, देवताओं की उपस्थिति, हिमवान के महल की शोभा तथा माता पार्वती की कठोर तपस्या का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा स्थल पर शिव-पार्वती विवाह की मनोहारी झांकी सजाई गई, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। विवाह प्रसंग के दौरान पूरा पांडाल “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोषों से गूंज उठा।

अपने प्रवचन में आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज ने विद्यार्थियों और युवाओं को विशेष संदेश देते हुए कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है जब उसके साथ संस्कार और अनुशासन जुड़े हों। उन्होंने माता-पिता एवं गुरुजनों के सम्मान को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए युवाओं से भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आज के समय में समाज को भौतिकता नहीं, बल्कि संस्कारों की आवश्यकता है। यदि परिवार और युवा पीढ़ी धर्म एवं संस्कृति से जुड़ी रहेगी तो समाज में सद्भाव, नैतिकता और सकारात्मकता का वातावरण बना रहेगा।
इस अवसर पर क्षेत्रीय पारीक परिषद, त्रिवेणी धाम शाहपुरा (जयपुर) द्वारा कथा व्यास परम पूज्य आचार्य श्री चंद्रशेखर जी महाराज का सम्मान भी किया गया। परिषद पदाधिकारियों ने उन्हें सम्मान पत्र भेंट कर अभिनंदन किया। सम्मान समारोह के दौरान श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।

आयोजक सुखाराम कड़वा ने बताया कि कथा महोत्सव को लेकर क्षेत्रभर के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पहले दिन भव्य कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया था तथा जगह-जगह पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया। कथा के आगामी दिनों में ध्रुव चरित्र, प्रह्लाद चरित्र, श्रीराम जन्म, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, गोवर्धन लीला, महारास, रुक्मिणी विवाह एवं सुदामा चरित्र सहित श्रीमद्भागवत के अनेक प्रेरणादायी प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।
कथा के अंत में महाआरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन समिति ने क्षेत्रवासियों से आगामी दिनों में भी अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण का लाभ लेने की अपील की।
