18 टांकों में सिल गया सिस्टम का चेहरा: मकराना की मासूम फ़ाईजा पूछ रही है — “क्या सड़कों पर अब इंसानों का हक नहीं रहा?”
तीन दिन पहले सांड ने सींगों पर उठाकर पटक दिया, आज भी दर्दभरी आंख से सिस्टम के लिए सवाल बह रहे हैं मकराना शहर में आवारा सांडों, निराश्रित गोवंश और आवारा कुत्तों का आतंक अब सिर्फ “समस्या” नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का जीवित प्रमाण बन चुका है। इसका सबसे दर्दनाक उदाहरण है वार्ड नंबर 44 स्थित ठाकुर साहब की आखली, मानधानिया की छतरियों के पास रहने वाली 11 वर्षीय मासूम फ़ाईजा। करीब डेढ़ साल पहले पिता मोहम्मद शकील का निधन हो चुका है। पिता के…
