दीपपुरा पंचायत में पेयजल संसाधन बदहाल: घर-घर नल योजना धरी रह गई, बूंद-बूंद पानी को तरसते ग्रामीण
सरकार शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती है और नेता मंचों से इसका श्रेय लेने में पीछे नहीं रहते। लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल उलट है। कुचामन सिटी की दीपपुरा पंचायत इसका ताजा उदाहरण है, जहां सरकारी योजनाओं के बावजूद ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। दीपुरा ग्राम पंचायत में करीब 90 प्रतिशत सार्वजनिक पेयजल संसाधन पूरी तरह कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। कहीं हैंडपंप जंग खाकर बंद पड़े हैं, तो कहीं सार्वजनिक नल पॉइंट शोपीस बनकर रह गए हैं।…
