कुचामन सिटी में मनाया विश्व स्पाइन डे, डॉ. मनोज मित्तल ने रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने का दिया संदेश

कुचामन सिटी। विश्व स्पाइन डे के अवसर पर शुक्रवार को कुचामन सिटी में रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया। फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. मनोज मित्तल ने रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने, कमर और गर्दन के दर्द से बचाव तथा सही जीवनशैली अपनाने के बारे में जानकारी दी।

डॉ. मनोज मित्तल ने बताया कि वर्तमान समय में लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर का उपयोग, घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, गलत शारीरिक मुद्रा और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कमर व गर्दन दर्द की समस्या आम होती जा है। समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान देकर और नियमित व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करके रीढ़ की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

गलत जीवनशैली बन सकती है कमर और गर्दन दर्द की वजह

रीढ़ की हड्डी शरीर को सहारा देने, संतुलन बनाए रखने और चलने-फिरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लंबे समय तक झुककर बैठना, गलत तरीके से भारी सामान उठाना, मोटापा, मांसपेशियों में खिंचाव तथा रीढ़ की डिस्क से संबंधित समस्याएं दर्द का कारण बन सकती हैं।

डॉ. मित्तल के अनुसार, कमर या गर्दन में लगातार दर्द, अकड़न, हाथ-पैरों में झनझनाहट अथवा सुन्नपन जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श लेकर उचित जांच और उपचार करवाना जरूरी है।

फिजियोथैरेपी और नियमित व्यायाम से मिल सकती है मदद

विश्व स्पाइन डे का उद्देश्य लोगों को रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूक करना और बचाव के लिए प्रेरित करना है। इस अवसर पर सही शारीरिक मुद्रा अपनाने, नियमित पैदल चलने, क्षमता के अनुसार व्यायाम करने, वजन नियंत्रित रखने और काम के दौरान बीच-बीच में उठकर चलने जैसी आदतों के महत्व को रेखांकित किया गया।

फिजियोथैरेपी कई प्रकार की मांसपेशियों और रीढ़ संबंधी समस्याओं में दर्द कम करने, मांसपेशियों को मजबूत बनाने तथा शरीर की गतिशीलता सुधारने में सहायक हो सकती है। हालांकि, उपचार और व्यायाम का चयन मरीज की स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह से किया जाना चाहिए।

जागरूकता ही स्वस्थ रीढ़ की पहली सीढ़ी

विश्व स्पाइन डे हर वर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य सभी आयु वर्ग के लोगों को रीढ़ की हड्डी की देखभाल, शारीरिक सक्रियता और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है।

इस अवसर पर संदेश दिया गया कि रीढ़ की सेहत को केवल दर्द होने पर ही महत्व नहीं देना चाहिए, बल्कि रोजमर्रा की आदतों में सुधार करके भी इसका ध्यान रखा जा सकता है। सही मुद्रा, नियमित गतिविधि और समय पर चिकित्सकीय सलाह स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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