कुचामन में भाजपा का सभापति, महेश रामचंद्रका 5 वोट से जीते; 26 साथ आए, 25 वोट मिले, एक वोट पर उठे सवाल

45 सदस्यीय सदन में महेश को 25 और आरिफ खान को 20 वोट, निर्दलीयों के समर्थन से भाजपा ने बनाया बोर्ड; अब चर्चा में एक वोट का रहस्य

कुचामन सिटी। कुचामन नगर परिषद के सभापति चुनाव में आखिरकार भाजपा ने बाजी मार ली। भाजपा प्रत्याशी महेश रामचंद्रका ने कांग्रेस के आरिफ खान को 5 वोटों के अंतर से हराकर सभापति पद पर जीत दर्ज की। महेश रामचंद्रका को कुल 25 वोट, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी आरिफ खान को 20 वोट मिले। परिणाम सामने आते ही भाजपा खेमे में जश्न का माहौल बन गया।

45 सदस्यीय कुचामन नगर परिषद में वार्ड चुनाव के दौरान कांग्रेस के 17, भाजपा के 15 और 13 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे। सभापति चुनाव में बहुमत का आंकड़ा 23 था। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक रही।

सुबह 10 बजे शुरू हुआ मतदान

सभापति चुनाव के लिए सोमवार सुबह 10 बजे नगर परिषद में मतदान प्रक्रिया शुरू हुई। सबसे पहले कांग्रेस के पार्षद नगर परिषद पहुंचे। रिटर्निंग अधिकारी सुरेंद्र सिंह चौधरी ने नियमानुसार पार्षदों को शपथ दिलाई, जिसके बाद सभापति पद के लिए मतदान हुआ।

इसके बाद भाजपा और उसके समर्थित पार्षद नगर परिषद पहुंचे और मतदान किया। अंत में निर्दलीय पार्षद मोहम्मद नासिर और बूंदू अली भी पहुंचे और अपने मत का प्रयोग किया।

मतदान के बाद मतगणना हुई और परिणाम घोषित किया गया। महेश रामचंद्रका के खाते में 25 वोट आते ही भाजपा समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।

वार्ड चुनाव में कांग्रेस आगे, लेकिन सभापति की कुर्सी भाजपा के खाते में

वार्ड चुनाव में कांग्रेस 17 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। भाजपा के पास 15 और निर्दलीयों के पास 13 सीटें थीं। इसके बावजूद सभापति चुनाव में भाजपा ने निर्दलीय पार्षदों का समर्थन जुटाकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया।
महेश रामचंद्रका खुद वार्ड चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीते थे। बाद में भाजपा ने उन्हें सभापति पद का प्रत्याशी बनाया। सभापति चुनाव में उन्हें 25 वोट मिले, जो बहुमत के आंकड़े से दो अधिक हैं। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी आरिफ खान को 20 वोट मिले।

26 साथ आए थे, वोट पड़े 25… आखिर एक वोट कहां गया? क्या सिर्फ एक वोट ही हुआ क्रॉस?

सभापति चुनाव के दौरान भाजपा खेमे में 15 भाजपा पार्षदों के साथ 11 निर्दलीय पार्षदों, यानी कुल 26 पार्षदों के साथ होने की चर्चा रही। लेकिन जब मतगणना का परिणाम सामने आया तो महेश रामचंद्रका के खाते में 25 वोट दर्ज हुए।
यहीं से एक नया सवाल खड़ा हो गया कि अगर भाजपा खेमे के साथ 26 पार्षद मतदान के लिए पहुंचे थे तो एक वोट महेश के पक्ष में क्यों नहीं गया?

चर्चा ये भी है कि क्रॉस वोट दोनों ही पार्टी के पार्षदों की और से हुए , अब इसमें कितनी सच्चाई है, या ये सिर्फ चर्चाओं की बात है लेकिन सवाल यही है कि भाजपा और समर्थित पार्षद जब 26 की संख्या में एक साथ मतदान के लिए पहुंचे थे तो फिर भाजपा को 25 मत ही क्यों मिले ?

क्या किसी पार्षद ने मतदान के दौरान अपना रुख बदला?

क्या किसी वोट की गणना अलग तरीके से हुई? या फिर समर्थन के समीकरण में अंतिम समय पर बदलाव आया? फिलहाल इस एक वोट को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।

हालांकि आधिकारिक रूप से किसी पार्षद के क्रॉस वोट करने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर उठे सवाल के रूप में ही देखा जा रहा है।

परिणाम में भाजपा प्रत्याशी को 25 और कांग्रेस प्रत्याशी को 20 वोट मिले, यानी कुल 45 वोट पड़े।

निर्दलीयों ने बदला पूरा सियासी गणित

कुचामन के चुनाव में 13 निर्दलीय पार्षदों ने पूरे समीकरण को दिलचस्प बना दिया था। भाजपा और कांग्रेस दोनों के पास अपने दम पर बहुमत नहीं था। ऐसे में निर्दलीयों का समर्थन निर्णायक बन गया।


अंतिम परिणाम में महेश रामचंद्रका को 25 वोट मिले, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भाजपा बहुमत का आंकड़ा हासिल करने में सफल रही। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार भाजपा को 10 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिला।

जीत के बाद भाजपा खेमे में जश्न

महेश रामचंद्रका की जीत की घोषणा होते ही भाजपा समर्थकों और कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। नगर परिषद के बाहर मिठाई बांटकर जीत की बधाई दी गई और जश्न मनाया गया। विजयी प्रत्याशी महेश रामचंद्रका को जुलूस के रूप में शा रखे मुख्य मार्गों से होते हुए वार्ड नम्बर 27 स्थित उनके कार्यालय तक ले जाया गया । जुलूस में हजारों भाजपा समर्थक मौजूद रहें ।

जीत के बाद राजस्व राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी भी नगर परिषद पहुंचे और नवनिर्वाचित सभापति महेश रामचंद्रका को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

विजय सिंह चौधरी ने जनता और पार्षदों का जताया आभार

राजस्व राज्य मंत्री विजय सिंह चौधरी ने कुचामन की जनता और निर्वाचित पार्षदों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पार्षदों के सहयोग से कुचामन नगर परिषद में भाजपा का बोर्ड बना है।
उन्होंने आने वाले समय में शहर के विकास को आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि पार्टी आने वाले पंचायत चुनाव में भी इसी तरह मजबूती से आगे बढ़ेगी।

महेश रामचंद्रका बोले, यह मेरी नहीं पूरे कुचामन की जीत

नवनिर्वाचित सभापति महेश रामचंद्रका ने जीत के बाद कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं बल्कि पूरे कुचामन की जीत है। उन्होंने कहा कि नए बोर्ड की प्राथमिकता शहर का विकास रहेगा।
उन्होंने शहर की समस्याओं के समाधान, मूलभूत सुविधाओं में सुधार और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की बात कही।

भाजपा चुनाव प्रभारी सूरज सोनी ने जीत कार्यकर्ताओं को समर्पित की

भाजपा के चुनाव प्रभारी सूरज सोनी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह जीत भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं को समर्पित है। उन्होंने कहा कि कुचामन सहित प्रदेश के निकाय चुनावों में पार्टी की ओर से जो संकल्प लिए गए थे, अब उन्हें धरातल पर उतारने का समय है।
उन्होंने कहा कि कुचामन नगर परिषद में भाजपा का बोर्ड बनने के बाद शहर के विकास से जुड़े संकल्पों को पूरा करने की दिशा में काम किया जाएगा।

महिला पार्षदों की एकजुटता भी रही चर्चा में

सभापति चुनाव में भाजपा एवं भाजपा समर्थित निर्दलीय महिला पार्षदों की एकजुटता भी चर्चा का विषय रही। जीत के बाद महिला पार्षदों ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपने-अपने वार्ड के मतदाताओं का आभार जताया।
महिला पार्षदों ने कहा कि वे अपने वार्डवासियों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने और वार्ड में विकास कार्यों को प्राथमिकता दिलाने का प्रयास करेंगी। सड़क, सफाई, बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को नगर परिषद में प्रमुखता से उठाने की बात कही गई।

यह पहल स्थानीय निकायों में महिला नेतृत्व और महिला जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी को भी सामने लाती है।

पांच वोट की जीत के साथ बदला कुचामन का सियासी गणित

सभापति चुनाव के परिणाम के साथ ही पिछले कई दिनों से चल रही राजनीतिक उठापटक और समर्थन जुटाने की कवायद का पटाक्षेप हो गया। कांग्रेस के 17 पार्षद होने के बावजूद वह बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी, जबकि भाजपा ने निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से 25 वोट हासिल कर लिए।
अब महेश रामचंद्रका कुचामन नगर परिषद के सभापति के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि चुनाव परिणाम के बाद 26 के साथ आने और 25 वोट मिलने का सवाल कुचामन की सियासत में चर्चा का नया विषय बन गया है।

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