40 वर्षों की तपस्या को मिला सम्मान: सुजानपुरा में प्रधानाचार्या अफरोज बेगम को भावभीनी विदाई, बेटियों की शिक्षा क्रांति की प्रेरणा के रूप में बनी पहचान

कुचामन सिटी उपखंड क्षेत्र के सुजानपुरा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बुधवार को एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक क्षण देखने को मिला, जब विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती अफरोज बेगम को उनके लगभग 40 वर्षों के गौरवमयी सेवाकाल पूर्ण होने पर भव्य सेवानिवृत्ति समारोह में विदाई दी गई। समारोह में शिक्षा, संस्कार और समर्पण की मिसाल रही अफरोज बेगम के योगदान को याद करते हुए हर आंख नम और हर दिल गर्व से भरा नजर आया।

 साधारण शुरुआत से असाधारण मुकाम तक का सफर

अफरोज बेगम ने वर्ष 1987 में जिलिया गांव के राजकीय विद्यालय से तृतीय श्रेणी शिक्षिका के रूप में अपने सेवाकाल की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने मौलासर, पांचवां, हिराणी और कुचामन सिटी के विभिन्न विद्यालयों में अपनी सेवाएं देते हुए शिक्षा जगत में मजबूत पहचान बनाई। मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने द्वितीय श्रेणी, प्रथम श्रेणी, उप प्रधानाचार्या होते हुए अंततः सुजानपुरा विद्यालय में प्रधानाचार्या का दायित्व संभाला। सेवाकाल के दौरान ही उन्होंने स्नातक, स्नातकोत्तर, बीएड और एमएड जैसी उच्च शिक्षा हासिल की ।

 सामाजिक बंधनों को तोड़कर बनीं मिसाल

अफरोज बेगम ऐसे परिवार से आती हैं, जिसने उस दौर में बेटियों की शिक्षा के लिए सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी। उनके पिता स्वर्गीय रफीक अहमद उस्मानी, जो शिक्षाविद और राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल खिलाड़ी थे, तथा माता स्वर्गीय रफीका बेगम ने उन्हें शिक्षा के लिए प्रेरित किया।

उनके इस कदम ने न केवल एक बेटी का भविष्य संवारा, बल्कि कुचामन सिटी और आसपास के मुस्लिम समाज में बेटियों की शिक्षा के लिए एक नई क्रांति की शुरुआत कर दी। 

आज उसी प्रेरणा का परिणाम है कि क्षेत्र की बेटियां उच्च शिक्षा हासिल कर विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे रही हैं।

पीहर और ससुराल—दोनों का मिला मजबूत साथ

अफरोज बेगम का विवाह डीडवाना निवासी शब्बीर अहमद सिद्दीकी के पुत्र शिक्षक अंसार अहमद सिद्दीकी से हुआ। उनके ससुराल पक्ष ने भी उन्हें शिक्षा और नौकरी के लिए पूरा सहयोग दिया।

एसटीसी करने के बाद जब अफरोज बेगम शिक्षिका बनीं, तब उनके ससुराल में इस उपलब्धि को लेकर खुशी का माहौल रहा। परिवार ने इसे केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा के रूप में देखा, ताकि अन्य लोग भी अपनी बेटियों को शिक्षा दिलाने के लिए आगे आएं।

पीहर और ससुराल—दोनों पक्षों के इस सकारात्मक निर्णय ने ही कुचामन सिटी और आसपास के मुस्लिम समाज में बेटियों की शिक्षा को नई दिशा दी, जिसका असर आज स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

 अल्प समय में भी विकास की मिसाल

सुजानपुरा विद्यालय में प्रधानाचार्या के रूप में भले ही उनका कार्यकाल कम रहा, लेकिन उन्होंने अपने निजी स्तर पर लगभग डेढ़ लाख रुपये खर्च कर विद्यालय में विकास कार्य करवाए और भामाशाहों को भी प्रेरित किया।

 शिक्षा के साथ संवेदनाओं का संगम – मंजू चौधरी 

पीएम श्री जवाहर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कुचामन सिटी की प्रधानाचार्या मंजू चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि अफरोज बेगम ने जवाहर स्कूल में लगभग 10 वर्षों तक एक उत्कृष्ट हिंदी व्याख्याता के रूप में सेवाएं दीं। उनका विद्यार्थियों के प्रति प्रेम, समर्पण और समाज सेवा का भाव सदैव प्रेरणादायक रहा है।

सेवानिवृत्ति समारोह में पीईईओ सरस्वती चौधरी ने कहा कि अफरोज बेगम सदैव शांत, सौम्य और विद्यालय के प्रति पूर्णतः समर्पित रही हैं। उन्होंने कम समय में ही विद्यालय को नई दिशा दी और विकास कार्यों की मिसाल पेश की।

उप प्रधानाचार्य डॉ. भंवरलाल गुगड़ ने कविता के माध्यम से उनके व्यक्तित्व को शब्दों में ढाला— कर्म और संस्कारों की गाथा लिखती रहीं, ऐसी हैं हमारी अफरोज दीदी…

युवा नेता शेखर कड़वा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अफरोज बेगम ने शिक्षा के क्षेत्र में जो कार्य किए हैं, वे केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

वहीं निसार अहमद सिद्दीकी ने ग़ज़ल के माध्यम से उनके जीवन की झलक प्रस्तुत की।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में छलका अपनापन

कार्यक्रम में छात्राओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। विदाई गीतों ने माहौल को भावुक बना दिया। छात्रा कनिष्का की कविता— छोड़कर जा रहे हो मंजर में…” ने सभी को भाव-विभोर कर दिया।

सम्मान और शुभकामनाओं की वर्षा

विद्यालय स्टाफ सदस्यों किस्तूर मल वर्मा, रमेशी मीणा, मुकेश महला, सुशीला मीणा, संगीता कंवर, संता राम गारी, लक्ष्मण राम मुआल द्वारा इस अवसर पर अफरोज बेगम को अभिनंदन पत्र, पेन, छाता एवं डायरी भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

समारोह में डॉक्टर अंजुम अख्तर सिद्दीकी,सैयद फारूक अली, सैयद अब्दुल कय्यूम अली, सैयद अब्दुल हमीद अली, अब्दुल माजिद जयपुर, अंसार अहमद सिद्दीकी, अकीक अहमद उस्मानी, सैयद मोहम्मद सईद,इसरार सिद्दीकी, अबरार सिद्दीकी, सैयद मोहम्मद फरीद, शबीक अहमद उस्मानी, अनीक उस्मानी,एपीपी नजीर सिद्दीकी, शारिक उस्मानी, जुबैर सिद्दीकी, सैयद समीर, सैयद शोएब ,वकार सिद्दीकी, मोइन सिद्दीकी,मुबीन सिद्दीकी,आरिब सिद्दीकी, अनेक प्रबुद्धजन मौजूद रहे।

वहीं  श्रीराम आंवला एडवोकेट ,भंवरा राम कड़वा , रतनाराम कड़वा भंवरा राम जी डीलर, दानाराम कड़वा, चेनाराम कड़वा , रामेश्वर जांगिड़, बनवारी लाल मेघवाल, प्रभु राम कड़वा, रामगोपाल वैष्णव, घनश्याम जी सहित अन्य ग्रामीणों ने भी अफरोज बेगम के कार्यों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

 शिक्षक का दायित्व कभी समाप्त नहीं होता — अफरोज बेगम

अपने भावुक संबोधन में अफरोज बेगम ने कहा कि मैंने अपने पूरे सेवाकाल में विद्यार्थियों के प्रति प्रेम, जरूरतमंदों की सहायता और विद्यालय के विकास को प्राथमिकता दी। शिक्षक का दायित्व कभी समाप्त नहीं होता, यह जीवनभर चलता है। मैं आगे भी समाज सेवा से जुड़ी रहूंगी।

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