आज के दौर में जहां शादियां लाखों रुपये की फिजूलखर्ची और दहेज की कुरीति में उलझती जा रही हैं, वहीं आदर्श नगर डीडवाना के प्रदीप गुर्जर ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने अपनी शादी में दहेज लेने से साफ इनकार करते हुए मात्र एक रुपया और नारियल स्वीकार कर समाज को एक सशक्त संदेश दिया। उनका विवाह मेड़ता रोड की कंचन के साथ सादगीपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। यह समारोह केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार की दिशा में उठाया गया प्रेरणादायक कदम बन गया।
टीके की राशि और उपहार भी लौटाए
विवाह के दौरान वधू पक्ष की ओर से परंपरानुसार टीके (शगुन) के रूप में नकद राशि और उपहार भेंट किए गए, लेकिन दूल्हे पक्ष ने उन्हें सम्मानपूर्वक लौटा दिया। यह दृश्य वहां उपस्थित लोगों के लिए भावुक और प्रेरणादायक था। इस दौरान दूल्हे प्रदीप गुर्जर ने भावुक शब्दों में कहा कि दुल्हन ही हमारे घर की सबसे बड़ी लक्ष्मी और सच्चा दहेज है। हमें किसी अन्य भौतिक वस्तु की आवश्यकता नहीं, बस प्रेम, विश्वास और संस्कारों की जरूरत है। उनकी इस सोच ने समारोह को एक अलग ही ऊंचाई दे दी।

गायत्री मंत्रों की गूंज में आध्यात्मिक आयोजन
विवाह समारोह पूरी तरह सादगी, संस्कार और आध्यात्मिक वातावरण से ओत-प्रोत रहा। गायत्री मंत्रों की पवित्र ध्वनि के बीच सभी रस्में सम्पन्न हुईं। दोनों परिवारों के मार्गदर्शन—प्रदीप के पिता भंवरलाल गुर्जर और कंचन के पिता नारायण राम गुर्जर की सहमति में यह आयोजन बिना आडंबर के संपन्न हुआ।
समारोह में उपस्थित परिजनों और मेहमानों ने इस निर्णय की खुलकर सराहना की और इसे समाज के लिए अनुकरणीय बताया।
अखिल विश्व गायत्री परिवार से जुड़ा है परिवार
यह परिवार अखिल विश्व गायत्री परिवार से गहराई से जुड़ा हुआ है। परम पूज्य गुरुदेव और वंदनीया माताजी के आदर्शों से प्रेरित होकर परिवार ने दहेज जैसी कुप्रथा को सिरे से नकार दिया।गायत्री शक्तिपीठ डीडवाना की व्यवस्थापिका एवं परिवार की सदस्य डॉ. ईशा गुर्जर ने इस विवाह के बारे में कहा कि मां गायत्री की कृपा से प्रेरित यह कदम समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है। दहेज एक अभिशाप है और ऐसे प्रयास इसे जड़ से खत्म करने में सहायक सिद्ध होंगे।

क्षेत्रभर में हो रही सराहना
इस विवाह की चर्चा डीडवाना ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों में भी हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब शादियों में दिखावे और प्रतिस्पर्धा की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, तब प्रदीप का यह कदम युवाओं के लिए प्रेरणा है।
संदेश साफ है — खुशियां संस्कारों में हैं, दहेज में नहीं
प्रदीप गुर्जर का यह निर्णय बताता है कि सच्ची खुशी सादगी, पारिवारिक मूल्यों और आपसी सम्मान में छिपी होती है। परम पूज्य गुरुदेव और मां गायत्री के आदर्शों से प्रेरित यह विवाह न केवल डीडवाना बल्कि पूरे राजस्थान के लिए एक मिसाल बन गया है।
