डीडवाना–कुचामन जिला पुलिस ने साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और आमजन को डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अभिनव प्रयोग की शुरुआत की है। तेजी से डिजिटल होती दुनिया में जहां एक क्लिक से सुविधाएं मिल रही हैं, वहीं दूसरी ओर साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग कॉल, केवाईसी अपडेट के नाम पर धोखाधड़ी और सोशल मीडिया हैकिंग जैसे अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए जिला पुलिस ने “साइबर पाठशाला” जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया है।

गुरुवार 12 फरवरी को पीएमश्री जवाहर नवोदय विद्यालय, कुचामन सिटी में आयोजित कार्यक्रम में जिला कलेक्टर डॉ. महेन्द्र खड़गावत और पुलिस अधीक्षक ऋचा तोमर ने संयुक्त रूप से अभियान का आगाज किया। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कुचामन सिटी विमल सिंह नेहरा, वृताधिकारी मुकेश चौधरी, मारोठ थानाधिकारी सुश्री ऋतु चौधरी आरपीएस प्रोबेशनर तथा विद्यालय की प्राचार्य डॉ. ओमवती दीक्षित सहित अनेक अधिकारी, शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक ऋचा तोमर के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कुचामन सिटी विमल सिंह नेहरा द्वारा संकलित पुस्तक “साइबर पाठशाला” का विमोचन किया गया। यह पुस्तक साइबर अपराधों से बचाव की एक व्यवहारिक मार्गदर्शिका के रूप में तैयार की गई है, जिसमें आमजन की भाषा में सरल उदाहरणों के माध्यम से साइबर सुरक्षा की बुनियादी से लेकर उन्नत जानकारी शामिल की गई है।

पुस्तक के संकलन कर्ता अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विमल सिंह नेहरा ने कहा कि आज साइबर अपराधी मनोवैज्ञानिक तरीके अपनाकर लोगों को डराते, लालच देते या भ्रमित करते हैं। “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए तरीकों से लोगों को वीडियो कॉल पर झूठे पुलिस अधिकारी बनकर धमकाया जाता है, केवाईसी अपडेट या लोन ऑफर के नाम पर लिंक भेजे जाते हैं, और एक छोटी-सी चूक से मेहनत की कमाई मिनटों में गायब हो जाती है।
उन्होंने कहा कि “साइबर पाठशाला” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सतत जन जागरूकता अभियान है। हमारा उद्देश्य है कि हर विद्यार्थी, हर युवा, हर महिला और हर ग्राम रक्षक साइबर सुरक्षा का दूत बने। यदि एक व्यक्ति जागरूक होता है तो वह अपने परिवार और समाज को भी सुरक्षित कर सकता है।
नेहरा ने बताया कि पुस्तक तैयार करते समय यह ध्यान रखा गया कि सामग्री जटिल तकनीकी भाषा में न होकर बिल्कुल सरल और याद रखने योग्य हो। इसी सोच के तहत “क से ज्ञ” तक साइबर सुरक्षा संदेशों को शामिल किया गया है, ताकि बच्चे भी आसानी से समझ सकें और बड़े भी उसे व्यवहार में ला सकें।

जिला पुलिस अधीक्षक ऋचा तोमर ने आमजन से अपील की कि— कभी भी OTP, PIN या पासवर्ड साझा न करें
किसी भी अनजान लिंक पर जल्दबाजी में क्लिक न करें
संदिग्ध कॉल आने पर घबराएं नहीं, तुरंत कॉल काटें
साइबर ठगी होने पर समय गंवाए बिना 1930 पर कॉल करें
www.cybercrime.gov.in� पोर्टल पर तुरंत शिकायत दर्ज करें
एसपी तोमर ने विशेष रूप से ग्राम रक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि गांव स्तर पर जागरूकता सबसे प्रभावी हथियार है। यदि ग्राम स्तर पर लोग सतर्क रहेंगे तो साइबर अपराधियों के लिए जमीन कमजोर हो जाएगी।

पुलिस अधीक्षक ऋचा तोमर ने कहा कि जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है और “साइबर पाठशाला” अभियान के तहत जिले के स्कूलों, कॉलेजों, चौपालों और ग्राम पंचायतों में लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
जिला कलेक्टर डॉ. महेन्द्र खड़गावत ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल दुनिया में सुविधा के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे तकनीक का उपयोग समझदारी से करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए साइबर सुरक्षा विषय पर क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई, विजेताओं को पुरस्कृत किया गया तथा ग्राम रक्षकों को साइबर जागरूकता पुस्तिका एवं बैज प्रदान किए गए।
साइबर सुरक्षा को आसान भाषा में समझाने की अनूठी पहल
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं पुस्तक के संकलन कर्ता एएसपी विमल सिंह नेहरा ने बताया कि “साइबर पाठशाला” की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें साइबर सुरक्षा को जटिल तकनीकी शब्दों में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सरल भाषा में समझाया गया है। आमतौर पर लोग साइबर सिक्योरिटी को कठिन विषय मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह पुस्तक बताती है कि छोटी-छोटी सावधानियां ही बड़े नुकसान से बचा सकती हैं।
इसी उद्देश्य से पुस्तक में “क से ज्ञ” तक साइबर सुरक्षा संदेशों को क्रमबद्ध रूप में शामिल किया गया है। यह एक तरह से डिजिटल युग का सुरक्षा मंत्र है, जिसे विद्यार्थी आसानी से याद रख सकते हैं और बड़े लोग भी अपने दैनिक जीवन में लागू कर सकते हैं।

इन संदेशों के माध्यम से पासवर्ड की मजबूती से लेकर फिशिंग कॉल से बचाव, पब्लिक वाई-फाई की सावधानियां, बैंकिंग सुरक्षा, सोशल मीडिया प्राइवेसी, हेल्पलाइन 1930 पर रिपोर्टिंग और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए साइबर अपराधों से बचने तक की पूरी जानकारी सरल और व्यवहारिक तरीके से दी गई है।
यह “क से ज्ञ” श्रृंखला न केवल जागरूकता बढ़ाती है, बल्कि लोगों को आत्मविश्वास भी देती है कि वे खुद को और अपने परिवार को साइबर ठगी से सुरक्षित रख सकते हैं।
CYBER SECURITY TIPS – क से ज्ञ
क – कड़ा पासवर्ड रखें। कम से कम 12 अक्षरों का मजबूत पासवर्ड ।
ख – खतरनाक लिंक से बचें संदिग्ध ई-मेल, SMS/लिंक पर क्लिक न करें।
ग – गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखें OTP, PIN, पासवर्ड किसी से साझा न करें।
घ – घर की तरह मोबाइल कंप्यूटर लॉक रखें स्क्रीन लॉक, पिन/बायोमेट्रिक का प्रयोग करें।
च – चेक- अनजान संदेश अज्ञात कॉल, मैसेज, ई-मेल पर भरोसा न करें।
छ – छुपाएँ सार्वजनिक Wi-Fi पर जानकारी पब्लिक Wi-Fi पर बैंकिंग/संवेदनशील काम न करें।
ज – जरूरी अपडेट समय पर करें मोबाइल, ऐप और सिस्टम अपडेट रखें।
झ- झांसे में न आएँ (फिशिंग से बचें) इनाम, लॉटरी, KYC या डराने वाले मैसेज से सावधान
ट – टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें हर अकाउंट में 2-स्टेप वेरिफिकेशन ऑन करें।
ठ – ठगी की गतिविधि तुरंत पहचानें असामान्य लेन-देन पर तुरंत ध्यान दें।
ड – डाउनलोड सोच-समझकर करें अनजान वेबसाइट ऐप से डाउनलोड न करें।
ढ – ढील न दें सुरक्षा में लापरवाही साइबर अपराध को बढ़ावा देती है।
त- तभी क्लिक करें जब भरोसा हो जल्दबाजी में किसी लिंक पर क्लिक न करें।
थ – थर्ड पार्टी ऐप्स से सावधान रहें अनावश्यक ऐप्स को अनुमति न दें।
द – दोहरी सुरक्षा अपनाएँ पासवर्ड + OTP दोनों का उपयोग करें।
ध – धोखाधड़ी दिखे तो रिपोर्ट करें साइबर अपराध की सूचना तुरंत दें।
न – नई सुरक्षा आदतें अपनाएँ समय-समय पर पासवर्ड बदलें।
प – पहचान की सुरक्षा करें ऑनलाइन प्राइवेसी सेटिंग्स मजबूत रखें।
फ – फायरवॉल और एंटीवायरस चालू रखें सुरक्षा सॉफ्टवेयर हमेशा अपडेट रखें।
ब – बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखें किसी कॉल पर कार्ड/OTP न बताएं।
भ – भरोसेमंद वेबसाइट ही उपयोग करें URL ध्यान से जांचे (https आदि)।
म – मोबाइल और ई-मेल सुरक्षित रखें रिकवरी ऑप्शन अपडेट रखें।
य – याद रखें: पुलिस कभी OTP नहीं मांगती डिजिटल अरेस्ट जैसे झूठे कॉल से बचें।
र – रिपोर्ट करें साइबर अपराध www.cybercrime.gov.in�, 1930
ल – लॉग-आउट करना न भूलें पब्लिक डिवाइस पर लॉग-इन के बाद लॉग-आउट करें।
व – वायरस से बचाव रखें संदिग्ध फाइले न खोलें।
श – शक होने पर रुकें पहले सोचें, फिर कार्य करें।
ष – सुरक्षित सोशल मीडिया उपयोग करें प्राइवेसी सेटिंग्स मजबूत करें।
स – सतर्क रहें, सुरक्षित रहें ऑनलाइन हर कदम सोच-समझकर उठाएँ।
ह – हेल्पलाइन का उपयोग करें समस्या होने पर 1930 पर कॉल करें।
क्ष – क्षति से पहले सावधानी जरूरी रोकथाम ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
त्र – त्रुटि दिखे तो तुरंत कार्रवाई करें गलत ट्रांजैक्शन तुरंत बैंक को बताएं।
ज्ञ – ज्ञान ही सबसे बड़ी सुरक्षा है साइबर सुरक्षा की जानकारी दूसरों तक भी पहुँचाएँ।
