अवैध विवाह स्थल और कानफोड़ू डीजे पर कोर्ट की सख्ती जारी: परिवहन निरीक्षक भी तलब, 10 बजे बाद डीजे पर रोक दोहराई; पार्किंग व्यवस्था पर मांगी रिपोर्ट


कुचामन शहर में घनी आबादी के बीच संचालित विवाह स्थलों और देर रात तक बजने वाले कानफोड़ू डीजे को लेकर चल रहा बहुचर्चित विवाद अब न्यायालय की सख्त निगरानी में है। सोमवार को इस मामले में हुई सुनवाई के दौरान परिवहन निरीक्षक मनोज शर्मा भी न्यायालय में उपस्थित हुए। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश तथा ताल्लुका विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष सुंदरलाल खरोल ने सभी पक्षों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि शहर में किसी भी सूरत में आमजन के लिए “न्यूसेंस” बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दरअसल यह मामला मानवाधिकार सुरक्षा संगठन राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मुन्नालाल काछवाल द्वारा प्री-लिटिगेशन के रूप में न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि शहर के सरला बिरला कल्याण मंडपम, नर्मदा गार्डन, बसंत कुमार बिरला बारात भवन, कोठारी भवन, न्यू माहेश्वरी भवन और गोदावरी गार्डन सहित कई विवाह स्थल घनी आबादी के बीच संचालित हो रहे हैं, जहां पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं है और देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजने से आसपास के रहवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।


मामले की पूर्व सुनवाई में न्यायालय ने नगर परिषद, पुलिस प्रशासन और विवाह स्थल संचालकों को नोटिस जारी कर तलब किया था। इसके बाद जिला परिवहन अधिकारी और परिवहन निरीक्षक को भी आवश्यक पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया गया था।
सोमवार को हुई सुनवाई में परिवहन निरीक्षक मनोज शर्मा, कुचामन थानाधिकारी सतपाल सिंह, नगर परिषद के रेवेन्यू ऑफिसर तथा विभिन्न विवाह स्थलों के प्रतिनिधि न्यायालय में उपस्थित हुए। प्रार्थी पक्ष की ओर से अधिवक्ता ओमप्रकाश पारीक ने न्यायालय को बताया कि विवाह स्थलों में पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण समारोह में आने वाले लोग सड़कों पर वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे आसपास के रहवासियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है और कई बार आपात स्थिति में एंबुलेंस तक के लिए रास्ता नहीं बचता।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश सुंदरलाल खरोल ने विवाह स्थल संचालकों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि विवाह स्थलों पर फ्लोर डीजे रात 10 बजे के बाद किसी भी हालत में नहीं बजने चाहिए और ध्वनि स्तर भी निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप ही होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि नियमों की अनदेखी हुई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सुनवाई में सरला बिरला कल्याण मंडपम के प्रतिनिधि ने पार्किंग के लिए जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी, जबकि बसंत कुमार बिरला बारात भवन और नर्मदा गार्डन के संचालकों ने पार्किंग की व्यवस्था होने का दावा किया। इस पर न्यायाधीश खरोल ने निर्देश दिए कि सभी विवाह स्थल संचालक नगर परिषद के रेवेन्यू ऑफिसर और कर्मचारियों की मौजूदगी में अपने-अपने पार्किंग स्थलों पर 19 मार्च तक स्पष्ट बोर्ड लगाकर पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करें और इसकी रिपोर्ट न्यायालय में पेश करें।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि विवाह स्थल किराये पर देते समय दो गार्ड तैनात किए जाएं, जो समारोह में आने वाले वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही खड़ा करवाएं, ताकि सड़कों पर अव्यवस्था और जाम की स्थिति न बने।


साथ ही न्यायालय ने परिवहन निरीक्षक मनोज शर्मा को निर्देश देते हुए कहा कि क्षेत्र में बिना नियमों के दौड़ रहे डीजे वाहनों पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। यदि किसी वाहन की भौतिक स्थिति नियमों के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाए और डीजे लगे वाहनों को जब्त कर बिना डिस्मेंटल किए सुपुर्द नहीं किया जाए।
प्रार्थी पक्ष के अधिवक्ता ओमप्रकाश पारीक ने बताया कि न्यायालय में नगर परिषद से विवाह स्थलों की निर्माण स्वीकृति फाइलें मंगवाने का भी निवेदन किया गया है। उनका कहना है कि यदि इन फाइलों का अवलोकन किया जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि शहर के कई विवाह स्थल स्वीकृत नक्शों के अनुरूप निर्मित नहीं हैं और अधिकांश जगह पार्किंग की व्यवस्था केवल कागजों में ही दिखाई गई है।
न्यायालय ने सभी पक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अब तक की कार्रवाई और प्रगति की रिपोर्ट के साथ अगली सुनवाई में उपस्थित हों। इस मामले की अगली पेशी 23 मार्च को तय की गई है।

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