भागदौड़ भरी इस जिंदगी में इंसान धन, करियर और पहचान की तलाश में देश-विदेश तक चला जाता है। कोई व्यापार में रमता है, कोई सामाजिक या राजनीतिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाता है, लेकिन जो अपनी मातृभूमि और बचपन के सखा-संगियों को नहीं भूलता, वही सच में भाग्यशाली कहलाता है। ऐसी ही मिसाल पेश की डीडवाना नगर के राजकीय बांगड़ कॉलेज के वर्ष 1975-76 के विद्यार्थियों ने।
करीब 50 वर्ष पहले कॉलेज की दहलीज पार करने वाले 40 मित्र आज भी हर साल एक बार मिलते हैं। कोई अलग-अलग राज्यों में बस गया, तो कोई देशांतर में जा बसा, लेकिन दोस्ती की डोर कभी कमजोर नहीं पड़ी। ये सभी मित्र वर्ष में एक बार किसी रमणीय स्थल या तीर्थ स्थान पर सहपत्नीक दो दिन के लिए मिलते हैं। वहां न सिर्फ हंसी-ठिठोली और मनोरंजन होता है, बल्कि बचपन की यादें ताजा होती हैं, जीवन के सुख-दुख साझा होते हैं और बीते वर्षों की अनजानी भूलों को भुलाकर जीवन का असली आनंद महसूस किया जाता है।

इस वर्ष जब इन मित्रों की मित्रता को 50 वर्ष पूरे हुए तो उन्होंने तय किया कि इस बार किसी बाहरी स्थल पर नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि डीडवाना में मिलेंगे और उन गुरुजनों को नमन करेंगे जिन्होंने उन्हें शिक्षा और संस्कार दिए। हालांकि समय के साथ अधिकांश गुरुजन इस दुनिया में नहीं रहे, फिर भी जिन पांच शिक्षकों से संपर्क हो सका, उनका सम्मान भव्य रूप से करने का निर्णय लिया गया।

डीडवाना की अग्रसेन वाटिका में आयोजित समारोह में पूर्व छात्रों की और से सजाई गई इस मित्रों की महफिल में अपने गुरुजनों का अभिनंदन पत्र, श्रीफल, माला और शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। सम्मानित शिक्षकों में प्रो. भागीरथ सिंह शेखावत, डॉ. भीकमचंद प्रजापत, प्रो. बद्री पोसवाल, प्रो. रामप्रसाद और डॉ. गोपी कृष्ण राठी शामिल रहे।
डीडवाना नागरिक सभा कोलकाता के अध्यक्ष एवं परिषद सदस्य अरुण प्रकाश मल्लावत ने बताया कि सभी सदस्य डीडवाना पहुंच चुके हैं और तीन दिवसीय निजी कार्यक्रमों के तहत विभिन्न मनोरंजक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि गुरुजनों का सम्मान करना हम सबके लिए गर्व और भावुक क्षण है।

सम्मानित शिक्षकों ने भी अपने संबोधन में कहा कि आज के युग में जब गुरु-शिष्य परंपरा कमजोर पड़ती दिख रही है, ऐसे में पूर्व छात्रों द्वारा सम्मानित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि संस्कार आज भी जीवित हैं। उन्होंने भावी पीढ़ी को इससे प्रेरणा लेने और सामाजिक समरसता के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में वॉइस ऑफ राजस्थान के गायन कलाकार सोमेश्वर शर्मा ने मधुर प्रस्तुतियां दीं, वहीं क्षेत्र के एएसपी हिमांशु शर्मा की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. गजादान चारण ने की।
पचास वर्षों बाद सजी मित्रों की ये महफ़िल केवल एक मिलन समारोह नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी थी कि सच्ची मित्रता और गुरुजनों के प्रति सम्मान ही जीवन का वास्तविक आनंद है।
