कुचामन सिटी में नन्हे रोजेदारों का हौसला: अजान, आलिशा और आदिल ने रखा पहला रोजा, अमन-चैन की मांगी दुआ

कुचामन सिटी में रमजान के पाक महीने का पहला दिन आज खास बन गया, जब शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के तीन मासूम बच्चों ने अपने जीवन का पहला रोजा रखकर सबका दिल जीत लिया। कम उम्र में इबादत के प्रति उनका जज़्बा और अनुशासन परिवारों के लिए गर्व का पल बन गया।

अजान ने पूरे दिन इबादत कर पूरा किया रोजा

कुचामन सिटी के बुडसू रोड निवासी शेख इखलाक के 7 वर्षीय बेटे शेख अजान ने पूरे उत्साह के साथ अपना पहला रोजा रखा। सुबह सहरी के लिए समय पर उठे,परिवार के साथ बैठकर सहरी की और रोजे की नियत कर रोजे की शुरुआत की ।

अजान ने दिन में सभी वक्त की नमाज अदा की और सब्र के साथ रोजा पूरा किया। इफ्तार से पहले उन्होंने देश में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे के लिए दुआ मांगी। शाम को परिवार के साथ रोजा खोलते समय घर में खुशी का माहौल रहा। शेख वसीम सहित परिजनों ने उनका गर्मजोशी से इस्तकबाल किया।

आलिशा ने भी रखा पहला रोजा, मासूम दुआओं ने किया भावुक

इसी कड़ी में 7 साल की आलिशा ने भी अपने जीवन का पहला रोजा रखकर परिवार को गौरवान्वित किया। सहरी में परिवार के साथ शामिल होकर उन्होंने रोजे की शुरुआत की। दिनभर इबादत में मन लगाया और नमाज अदा की। इफ्तार से पहले उन्होंने भी देश की तरक्की और सुख-शांति के लिए दुआ की।


इस अवसर पर आलिशा के पिता सबीर हुसैन पांचवां वाले ने कहा कि छोटे बच्चों में रोजा रखने की लगन यह दर्शाती है कि परिवार उन्हें धार्मिक संस्कारों से जोड़ रहा है। उन्होंने इसे समाज के लिए सकारात्मक संकेत बताते हुए बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मोहल्ला लुहारान के आदिल जोया ने भी रखा पहला रोजा

कुचामन सिटी के मोहल्ला लुहारान निवासी आबिद जोया के 7 वर्षीय बेटे आदिल जोया ने भी अपनी जिंदगी का पहला रोजा रखकर मिसाल पेश की। सुबह सहरी के समय उत्साह के साथ उठे और रोजे की नियत कर दिन की शुरुआत की।

पूरे दिन उन्होंने हिम्मत और सब्र के साथ रोजा रखा तथा नमाज अदा की। इफ्तार से पहले आदिल ने भी देश में अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए दुआ की। शाम को परिवार के साथ रोजा खोलते समय घर में खुशी और गर्व का माहौल देखने को मिला। परिजनों और मोहल्लेवासियों ने उन्हें दुआओं से नवाजा।

तीनों नन्हे रोजेदारों का यह पहला रोजा कुचामन सिटी में चर्चा का विषय बना रहा। मासूम चेहरों पर इबादत की चमक और दिलों में भरी दुआओं ने रमजान की रूहानी फिजा को और भी खास बना दिया।

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