कुचामन : महाराजा सूरजमल जयंती पर उमड़ा जनसैलाब, वीरता और किसान हितैषी नीतियों को किया नमन

कुचामन सिटी नगर परिषद की और से घोषित डीडवाना रोड मेगा हाईवे बाईपास स्थित महाराजा सूरजमल सर्किल शुक्रवार को श्रद्धा, उत्साह और गौरव के वातावरण से सराबोर नजर आया, जब महान शासक, दूरदर्शी योद्धा और किसानों के संरक्षक महाराजा सूरजमल की जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन महाराजा सूरजमल सामाजिक संगठन के नेतृत्व में किया गया, जिसमें समाज के गणमान्य नागरिकों, युवाओं, महिलाओं तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

कार्यक्रम की शुरुआत महाराजा सूरजमल की प्रतिमा पर पुष्प माल्यार्पण और सामूहिक पुष्पांजलि से हुई। उपस्थित जनसमूह ने उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। वातावरण “महाराजा सूरजमल अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।

महाराजा सूरजमल सामाजिक संगठन के अध्यक्ष परसाराम बुगालिया, ने अपने संबोधन में महाराजा सूरजमल के व्यक्तित्व और कृतित्व की जानकारी देते हुए कहा कि वे केवल भरतपुर रियासत के शासक ही नहीं, बल्कि 18वीं शताब्दी के उन विरले राष्ट्रनायकों में से थे जिन्होंने राजनीतिक दूरदर्शिता, सैन्य कौशल और न्यायप्रिय शासन का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

वर्ष 1707 में जन्मे महाराजा सूरजमल को ‘जाटों का प्लेटो’ कहा जाता है। उन्होंने भरतपुर राज्य को संगठित और सशक्त बनाया तथा मुग़ल और अफ़ग़ान आक्रमणों के दौर में अपनी रणनीतिक क्षमता से उत्तर भारत की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वक्ताओं ने बताया कि महाराजा सूरजमल ने किसान, मजदूर और कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनका शासन न्याय, सामाजिक समरसता और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक था। वे प्रशासनिक कुशलता, आर्थिक सुदृढ़ता और जनकल्याणकारी नीतियों के लिए आज भी स्मरण किए जाते हैं।

मुन्नाराम महला और कमलकांत डोडवाडिया ने कहा कि महाराजा सूरजमल केवल एक शासक नहीं थे, बल्कि वे समाज के अंतिम व्यक्ति के अधिकारों के प्रहरी थे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे महाराजा सूरजमल के साहस, स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति और संगठन क्षमता से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न वक्ताओं ने उनके शौर्य, कुशल प्रशासन और किसान हितैषी निर्णयों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि उनके आदर्श सामाजिक एकता और आत्मसम्मान की भावना को मजबूत करते हैं।
अंत में सामूहिक रूप से पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का समापन किया गया। कुचामन में आयोजित यह जयंती समारोह न केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि था, बल्कि समाज को उनके सिद्धांतों पर चलने का प्रेरक संदेश भी दे गया ।

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