परबतसर उपखंड के सिडियास गांव स्थित बालाजी मंदिर परिसर में मंगलवार को धार्मिक आस्था और श्रद्धा के वातावरण के बीच श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। कथा की शुरुआत से पूर्व गांव में भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं व पुरुष शामिल हुए। कलश यात्रा गांव के मुख्य मार्गों से होते हुए पूरे गांव में भक्तिमय माहौल बनाती हुई पुनः कथा स्थल पर पहुंची।
कलश यात्रा संपन्न होने के बाद कथा वाचन आरंभ हुआ। कथा के प्रथम दिवस महाराज श्री भिकचंद शास्त्री जी (वृंदावन वाले) ने विधिवत देव पूजन कर कथा का आरंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत कथा श्रवण से मनुष्य के पापों का नाश होता है और जीवन में सदाचार का भाव जागृत होता है। कथा मनुष्य को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करती है और वही सन्मार्ग अंततः मोक्ष का द्वार खोलता है।
महाराज श्री ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा में सृष्टि की रचना से लेकर भगवान के विभिन्न अवतारों—विशेष रूप से श्रीराम और श्रीकृष्ण—तथा जीव-जगत की उत्पत्ति और अंत तक की दिव्य कथाएं वर्णित हैं। यह कथा भक्तियोग और वैराग्य का मार्ग दिखाती है। उन्होंने बताया कि यह वही अमृतमयी कथा है जिसे महर्षि सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को सुनाया था, जिससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।
कथावाचक ने आगे कहा कि भागवत कथा का श्रवण करने से व्यक्ति को आंतरिक शांति की अनुभूति होती है, जीवन में सकारात्मकता आती है, दीर्घायु का वरदान मिलता है और सांसारिक कष्टों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की उपस्थिति और उनका भावपूर्ण श्रवण इस बात का प्रमाण था कि गांव में धार्मिक चेतना का विशेष संचार हुआ है।
भागवत कथा के शुभारंभ अवसर पर समूचा सिडियास गांव भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर नजर आया।
