कुचामन नगरपरिषद बोर्ड बैठक में हंगामा, 23 मिनट में पारित हुए सात प्रस्ताव,एजेंडा कॉपी फाड़कर सभापति-आयुक्त पर फेंकी, धक्का-मुक्की के बीच पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप

नगरपरिषद कुचामन सिटी के सभागार में मंगलवार को आयोजित साधारण सभा की बैठक उस समय विवादों में घिर गई, जब विपक्षी कांग्रेस पार्षदों ने बैठक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जोरदार विरोध शुरू कर दिया। कुछ ही मिनटों में माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि पार्षदों ने एजेंडा कॉपी फाड़कर सभापति और आयुक्त की ओर फेंक दी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।

बैठक की शुरुआत से ही गरमाया माहौल

बैठक शुरू होते ही पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं पार्षद फजलू रहमान कुरैशी,सुभाष पावड़िया,फारूक शेख, जवानाराम इकराम भाटी ,अयूब तेली ,शाहरुख कुरैशी ,नाजिया खान सहित कांग्रेस पार्षदों ने अतिक्रमण, विकास कार्यों और अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग उठाई। उनका आरोप था कि विपक्ष को बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है और जानबूझकर माइक बंद रखे जा रहे हैं। इसी बीच सभापति सुरेश सिखवाल ने एजेंडे के तहत सात प्रस्ताव सदन में रखे। भाजपा पार्षदों ने टेबल बजाकर प्रस्तावों का समर्थन किया और महज 23 मिनट में बैठक समाप्त करने की घोषणा कर दी गई।

23 मिनट में सात प्रस्ताव पास, विपक्ष भड़का

बैठक इतनी तेजी से समाप्त होने पर कांग्रेस पार्षद भड़क गए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी चर्चा के जबरन प्रस्ताव पारित कर दिए गए। इसके बाद सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। ‘सभापति मुर्दाबाद’ और ‘आयुक्त मुर्दाबाद’ के नारों के साथ कांग्रेस पार्षद धरने पर बैठ गए। माहौल लगातार उग्र होता चला गया।

प्रोसिडिंग कॉपी फाड़ी, सभापति-आयुक्त पर फेंकने का आरोप

हंगामे के दौरान जब नगर परिषद आयुक्त शिकेश कांकरिया प्रस्ताव पढ़ने लगे, तब पार्षद फजलू रहमान कुरैशी और सुभाष पावड़िया ने एक-एक प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग की। इसी बीच कांग्रेस पार्षद सभापति और आयुक्त के सामने पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। आरोप है कि इसी दौरान एजेंडे की कॉपी फाड़कर सभापति और आयुक्त की ओर फेंकी गई। जवाब में सत्तापक्ष के पार्षदों ने भी भारत माता के जयकारे लगाए, जिससे सदन का माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

धक्का-मुक्की, पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप

विरोध के दौरान पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस सुरक्षा कर्मियों को बीच-बचाव करना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद हालात को काबू में किया गया। इसके बाद सभापति सुरेश सिखवाल और आयुक्त शिकेश कांकरिया बैठक छोड़कर बाहर चले गए।

कांग्रेस पार्षदों ने किया बैठक का बहिष्कार

हंगामे के बाद कांग्रेस पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया। उनका कहना था कि बिना चर्चा के पारित किए गए प्रस्ताव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन हैं और वे ऐसे किसी भी निर्णय को स्वीकार नहीं करेंगे।

आयुक्त का पक्ष: बहुमत से पास हुए सभी प्रस्ताव

नगर परिषद आयुक्त शिकेश कांकरिया ने कहा कि सभापति की अध्यक्षता में बोर्ड की बैठक विधिवत आयोजित की गई थी। एजेंडे में शामिल सभी सात प्रस्ताव बहुमत से पारित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान प्रोसिडिंग कॉपी फाड़ने की घटना की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

कांग्रेस पार्षदों का आरोप: जानबूझकर नहीं दी गई बोलने की अनुमति

कांग्रेस पार्षद फजलू रहमान कुरैशी ने कहा कि कांग्रेस पार्षदों को जानबूझकर बोलने नहीं दिया गया। पहले ही प्रस्ताव पर उन्होंने विरोध दर्ज कराया था, लेकिन सभापति और आयुक्त ने मनमर्जी करते हुए सभी प्रस्ताव पारित घोषित कर दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रस्ताव पर पूरी चर्चा नहीं हुई, इसलिए कांग्रेस पार्षदों ने बैठक का बहिष्कार किया।

सभापति का जवाब: विकास कार्यों में नहीं आएगी बाधा

सभापति सुरेश सिखवाल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बोर्ड की बैठक में सभी प्रस्ताव बहुमत से पारित किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन निर्णयों से शहर के विकास कार्यों में कोई बाधा नहीं आएगी और जनता के हित में कार्य जारी रहेंगे।

ये रहे बैठक में पारित प्रमुख प्रस्ताव

बैठक में शहर के विकास से जुड़े कई अहम प्रस्ताव रखे गए, जिनमें प्रमुख रूप से —

विनायक कॉम्पलेक्स से शिव मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण हटाने, सब्जी मंडी को कृषि मंडी में स्थानांतरित कर पार्किंग स्थल विकसित करने, अम्बेडकर सर्किल से लुहारिया बास होते हुए गौशाला मार्ग तक सड़क चौड़ीकरण, पत्रकार कॉलोनी में भूखंड आवंटन, विभिन्न विकास कार्यों की स्वीकृति, नगर परिषद कर्मचारियों के नियमितीकरण और शहर के प्रमुख मार्गों व सर्किलों के नामकरण से जुड़े प्रस्ताव शामिल रहे।

नगरपरिषद की कार्यप्रणाली पर फिर उठे सवाल

बैठक में हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर नगरपरिषद की कार्यप्रणाली और राजनीतिक टकराव को उजागर कर दिया है। जहां सत्तापक्ष इसे विकास से जुड़ा अहम निर्णय बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए लगातार विरोध कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है।

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