खुदा अपने वलियों से होता है राज़ी ,मिलेगी ये दर से हमें सरफ़राज़ी……मारोठ में हाजी बाबा का सालाना उर्स अकीदत और सूफियाना रंग में संपन्न,

मारोठ में सूफी संत हाजी बाबा का सालाना उर्स पूरे अकीदत, एहतराम और रूहानी माहौल के बीच संपन्न हो गया। उर्स के मौके पर मुस्लिम समाज की ओर से चादर चढ़ाई गई, जबकि असर और मगरिब की नमाज के दरमियान विशेष चादरपोशी की रस्म अदा की गई। इस दौरान दरगाह परिसर सूफियाना कलामों और दुआओं की सदाओं से गूंज उठा, जिससे पूरा माहौल इबादत और भाईचारे की भावना से सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम की शुरुआत कव्वाली से हुई, जहां कव्वालों ने अपनी शानदार प्रस्तुति से जायरीनों को भावविभोर कर दिया। सूफियाना कलाम की मधुर धुनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। इसके बाद कुल की रस्म अदा की गई। असर की नमाज के बाद उर्स कमेटी के सदस्यों और बड़ी संख्या में मौजूद जायरीनों ने दरगाह शरीफ पर चादर पेश की। मगरिब की अज़ान से पहले तक दुआओं का सिलसिला चलता रहा, जिसमें हर शख्स ने अपनी-अपनी मुरादें अल्लाह की बारगाह में पेश कीं।
हाजी बाबा की दरगाह पर अकीदतमंदों ने मुल्क में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए खास दुआएं मांगी।

उर्स कमेटी के सदस्यों ने बताया कि असर और मगरिब के बीच विशेष चादरपोशी और सामूहिक दुआ का आयोजन किया गया। उर्स के सफल आयोजन में कमेटी के सदस्यों और समाजसेवियों ने अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान इमरान कुरैशी, बाबूलाल कुरैशी, सलीम शाह, शब्बीर शाह, आसिफ कुरैशी, शोएब कुरैशी, मोहसिन कुरैशी, सलामुद्दीन कुरैशी, लकी कुरैशी, असलम लाइट डेकोरेशन, आर.के. माली, गुरु कृपा साउंड, हितेश रारा और शरीफ कुरैशी सहित कई लोग व्यवस्था संभालते नजर आए।

अंत में श्रद्धालुओं में शिरनी (प्रसाद) का वितरण किया गया, इसी के साथ हाजी बाबा के सालाना उर्स का आधिकारिक समापन हुआ। उर्स के समापन पर क्षेत्र में शांति, सद्भाव और भाईचारे का संदेश गूंजता नजर आया, जिसने आयोजन को यादगार बना दिया।

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