नावां शहर में खसरा नंबर 1174 पर शुरू किए गए 425 करोड़ रुपये के सोलर प्लांट को लेकर जारी विरोध आज गुरुवार को और उग्र हो गया। बीहड़ बचाओ आंदोलन के बैनर तले बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी और महिलाएँ रास्तों पर उतर आए और सोलर कंपनी के वाहनों को घेर लिया। इसी दौरान महिलाओं और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की और बहसबाजी हो गई, जिसमें दो महिलाएँ चोटिल भी हो गईं। मौके पर तनाव काफी देर तक बना रहा।
नियम विरुद्ध काम नहीं होने देंगे”—लोगों का साफ़ संदेश
ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर सोलर प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, वह राजस्व रिकॉर्ड में विवादित है और जमाबंदी स्थगन के आदेश की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। साथ ही कटानी रास्ते पर अवैध अतिक्रमण, चरागाह भूमि का उपयोग और खेजड़ी के सैकड़ों पेड़ों की कटाई जैसे गंभीर आरोप कंपनी पर लगाए जा रहे हैं। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में खेजड़ी के पेड़ काटे गए और अधिकारी नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए दो बार जबरन काम शुरू करवाने पहुंचे। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि अधिकारियों को नियमों के खिलाफ जाकर कंपनी का पक्ष लेना पड़ रहा है?”
पुलिस-प्रशासन और स्थानीय निवासी आमने-सामने
आज गुरुवार को नावां तहसीलदार रामेश्वर गढ़वाल और नावां थानाधिकारी नंदलाल चौधरी पुलिस जाब्ते के साथ कंपनी का बंद काम शुरू करवाने पहुंचे। जैसे ही मशीनें आगे बढ़ीं, आसपास के गांवों से महिलाएं और स्थानीय निवासी बड़ी संख्या में मौके पर पहुँच गए। “पेड़ बचाओ—बीहड़ बचाओ” के नारे गूंजने लगे और ग्रामीणों ने रास्ता जाम कर दिया।
स्थिति तब बिगड़ी जब पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग करने की कोशिश की। महिलाएं आगे डट गईं, जिससे गर्मागर्मी बढ़ी और कई मिनटों तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर रही। तनाव बढ़ता देख मौके पर मौजूद अधिकारियों को भी वहीं रुकना पड़ा, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ सका।

क्यों भड़का इतना बड़ा विरोध?
नावां के बीहड़ क्षेत्र में प्रस्तावित यह सोलर प्रोजेक्ट लगभग 425 करोड़ रुपये की लागत से लगाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह पूरा इलाका वर्षों से चरागाह, स्थानीय मवेशियों का ठिकाना, पक्षियों का प्राकृतिक आवास और खेती तक पहुंचने का परंपरागत रास्ता रहा है।
कंपनी जमीन समतल करने के नाम पर सैकड़ों खेजड़ी और अन्य पेड़ों को उखाड़ चुकी है, जो मरुस्थलीय क्षेत्र की जीवनरेखा माने जाते हैं। गांवों के पारंपरिक मार्ग बंद किए जा रहे हैं, जिससे किसानों, मवेशियों और ग्रामीणों की दैनिक आवाजाही बाधित हो रही है।
दो दिन पहले भी उग्र था माहौल
दो दिन पहले महिलाओं ने मौके पर पहुँचकर कट रहे पेड़ों को गले लगाकर विरोध दर्ज कराया था। उसी दिन विरोध के दौरान भीड़ ने तहसीलदार के वाहन के टायर की हवा भी निकाल दी थी। बाद में एसडीएम दिव्या सोनी की मौजूदगी में बैठक हुई, पर ग्रामीणों और कंपनी के बीच किसी भी बिंदु पर सहमति नहीं बनी।
लोगों की चेतावनी—“मांगें नहीं मानी तो संघर्ष और तेज होगा”
आज काम दोबारा शुरू करवाने की कोशिश असफल रहने के बाद ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि चरागाह भूमि की सुरक्षा, पारंपरिक मार्गों की बहाली, खेजड़ी सहित सभी पेड़ों की कटाई पर तत्काल रोक , जैसी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन अगले चरण में प्रवेश करेगा।फिलहाल बीहड़ क्षेत्र में माहौल भारी तनावपूर्ण है और प्रशासन भी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है, लेकिन लोगों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा।
