अश्लील वीडियो,धमकी, दुष्कर्म ,ब्लैकमेल और पुलिस की बेरुखी — मारोठ में महिला की पीड़ा ने खोली व्यवस्था की पोल

डीडवाना-कुचामन जिले के मारोठ थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोर दिया है, बल्कि स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चार साल पहले शिंभूपूरा निवासी शीशपाल नामक युवक ने एक विवाहिता के अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी और इसी डर के साए में पीड़िता से कई बार दुष्कर्म किया।

सूत्रों के अनुसार, पिछले चार साल से आरोपी लगातार पीड़िता को ब्लैकमेल कर रहा था। उसने न केवल धमकियों का सहारा लिया बल्कि अश्लील वीडियो और तस्वीरों के जरिए लाखों रुपए भी वसूले। पीड़िता जब इस संबंध से बाहर निकलना चाही तो शीशपाल ने उसे डराने के लिए वीडियो और फोटो व्हाट्सएप पर भेज दिए। यही नहीं, आरोपी ने ये वीडियो और फोटो अपने साथियों राजेंद्र और छीतरमल समेत कई अन्य मित्रों को भी दे दिए। इन लोगों ने भी वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता से दुष्कर्म करने की कोशिशें कीं।

मामला यहीं नहीं रुका। दस से ज्यादा मोबाइल नंबरों से लगातार धमकी भरे संदेश और अश्लील वीडियो पीड़िता के मोबाइल पर भेजे गए। डर, अपमान और सामाजिक लोकलाज से टूटकर पीड़िता ने आत्महत्या करने की भी कोशिश की। हालांकि पति ने समझाइश का रास्ता अपनाया, लेकिन अपराधियों ने परिवार को डरपोक समझकर उनका जीना और मुश्किल कर दिया।

स्थिति इतनी भयावह हो गई कि दीपावली के दिन भी पीड़िता के पति पर जानलेवा हमला कर दिया गया। जब परिवार न्याय की आस लेकर मारोठ थाने पहुंचा तो वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी। परिजनों का आरोप है कि थानाधिकारी ने आरोपी पक्ष के दबाव में आकर पीड़ित परिवार को ही झूठी रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार कर लिया।

पीड़िता ने आखिरकार हिम्मत जुटाकर डीडवाना पुलिस अधीक्षक कार्यालय का रुख किया। वहां उसने बलात्कार, गैंगरेप, ब्लैकमेल और जान से मारने की कोशिश सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करवाने की मांग की।

इस पूरे घटनाक्रम पर डीडवाना पुलिस अधीक्षक ऋचा तोमर के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु शर्मा ने पीड़िता और उसके परिजनों की आपबीती सुनी। उन्होंने निष्पक्ष जांच और न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया।

यह मामला न केवल महिला सुरक्षा और सम्मान की गंभीर चुनौती को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि जब व्यवस्था संवेदनहीन हो जाए तो एक पीड़िता के लिए न्याय तक पहुंचना कितना कठिन हो जाता है।

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