अटल निश्चय और एकाग्रता से रचा इतिहास – छोटी बेरी के मोईन खान हार ना मानने के जज़्बे की कहानी
इंजीनियरिंग के बाद सिविल सेवा की राह चुनी, पहले ही प्रयास में हासिल की आरएएस में सफलता

डीडवाना-कुचामन जिले के छोटे से गांव छोटी बेरी के मोईन खान ने यह साबित कर दिया कि जब इरादे मजबूत हों और दिशा स्पष्ट, तो सफलता स्वयं रास्ता बनाती है। मोईन ने अपने अटल निश्चय, निरंतर मेहनत और एकाग्रता के बल पर राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब उन्होंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय लिया, तो उसी दिशा में पूरी समर्पण भावना के साथ जुट गए। रोज़ाना अध्ययन, आत्मविश्लेषण और अनुशासित दिनचर्या ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।

पहले ही प्रयास में मिली बड़ी कामयाबी
मोईन खान ने अपने पहले ही प्रयास में RAS प्री, मेंस और इंटरव्यू—तीनों चरणों को सफलता पूर्वक पार करते हुए अंतिम परिणाम में 483वीं रैंक हासिल की। यह उपलब्धि उनकी मेहनत और आत्मविश्वास की कहानी कहती है। गांव, परिवार और समाज में इस सफलता से खुशी की लहर दौड़ गई और सभी ने मोईन की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया।
पत्रकार पिता और प्रेरक परिवार का साथ
मोईन खान के पिता हनीफ खान ‘तन्हा’, डीडवाना के वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने बेटे की इस कामयाबी पर कहा कि मोईन ने हर लक्ष्य के प्रति पूरी ईमानदारी दिखाई। उसने कभी किसी शॉर्टकट पर भरोसा नहीं किया, बल्कि लगन और आत्मअनुशासन से यह सफलता पाई।”

मोईन की मां इस्लाम खातून ने भी बेटे की सफलता में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि बचपन से ही मोईन पढ़ाई में गंभीर थे और हमेशा लक्ष्य को लेकर सजग रहते थे।
बचपन से ही होनहार और संकल्पवान
मोईन खान की पढ़ाई का सफर हमेशा उत्कृष्ट रहा। उन्होंने दसवीं में 90% और बारहवीं में 87% अंक प्राप्त किए। इसके बाद उन्होंने एनआईटी श्रीनगर से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद जब अधिकांश साथी निजी क्षेत्र की नौकरियों की ओर बढ़े, तब मोईन ने समाज की सेवा का मार्ग चुना और सिविल सेवा की तैयारी शुरू की।

ननिहाल से मिला शिक्षा और संस्कारों का वरदान
मोईन का ननिहाल कुचामन सिटी में है, जहां के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् हाजी मुकारब खान उनके नाना हैं। मुकारब खान और उनका परिवार शिक्षा के क्षेत्र में अपनी गहरी पहचान रखता है। मोईन के बड़े मामाजी लियाकत अली खान प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हैं, मंझले मामाजी उस्मान खान जलदाय विभाग में एक्सईएन, जबकि छोटे मामाजी लुकमान खान सीनियर नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। सभी ने मोईन को हमेशा सकारात्मक सोच और निरंतर परिश्रम के लिए प्रेरित किया।
आईपीएस बुआ से मिली दिशा और हौसला
मोईन की बुआ आईपीएस असलम खान ने भी उन्हें सिविल सेवा में जाने की प्रेरणा दी। वे लगातार मोईन को यह समझाती रहीं कि सच्ची मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती और हर प्रयास सफलता की ओर एक कदम होता है। मोईन ने इस सीख को आत्मसात किया और अपने धैर्य व समर्पण से यह मुकाम हासिल किया।

गांव में जश्न और युवाओं के लिए प्रेरणा
छोटी बेरी गांव में मोईन की कामयाबी की खबर फैलते ही जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटीं और गर्व से कहा कि मोईन ने गांव का नाम ऊंचा किया है। उनकी सफलता आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है — यह सिखाती है कि अगर एकाग्रता, निश्चय और निरंतर मेहनत तीनों साथ हों, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
