कुचामन में किसानों का महा आंदोलन : फसल मुआवजा सहित 11 सूत्री मांगों पर गरजे हजारों किसान, SDM को सौंपा ज्ञापन

कुचामन सिटी की कृषि मंडी आज किसानों के नारों और एकजुटता की ताकत से गूंज उठी। “किसान क्रांति बदलाव का आगाज” कार्यक्रम के तहत हजारों किसान युवा नेता रामनिवास पोषक के नेतृत्व में एकत्र हुए और फसल मुआवजा, बिजली दरों में राहत, सिंचाई व्यवस्था सुधार, प्याज़ मंडी की स्थापना जैसी 11 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

 बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान

किसानों ने सभा में कहा कि हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलें तबाह हो गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा लेकिन इसके बावजूद, अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस राहत या मुआवजा नहीं मिला है। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि तुरंत सर्वे करवाकर फसल नुकसान का आकलन किया जाए और न्यायोचित मुआवजा राशि किसानों के खातों में जमा की जाए।

 कुचामन में प्याज़ मंडी और बिजली दरों में राहत की मांग

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कुचामन सिटी में प्याज़ मंडी की स्थापना की मांग भी रखी, ताकि क्षेत्र के किसान अपनी उपज को स्थानीय स्तर पर बेच सकें और बिचौलियों से राहत मिले। साथ ही, बढ़ती बिजली दरों को लेकर किसानों ने नाराजगी जताई और कहा कि कृषि कार्य के लिए बिजली दरों में रियायत दी जानी चाहिए।

 SDM को सौंपा 11 सूत्री ज्ञापन

प्रदर्शन के बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने उप जिलाधिकारी (SDM) को ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में फसल मुआवजा, किसान ऋण माफी, मुफ्त बीज वितरण, पशुपालन सहायता, सिंचाई व्यवस्था में सुधार जैसी प्रमुख मांगें शामिल थीं। किसान नेताओं ने कहा कि अगर सरकार ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

 युवा नेतृत्व की अगुवाई में एकजुट हुआ किसान समुदाय

कार्यक्रम में क्षेत्र के कई युवा नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस अवसर पर यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष मनोज भगत, सुरेश सेवदा, रामनिवास गोयल, विजेंद्र मुहाल, मेघराज गुर्जर, कुलदीप सेवर और हर्षवर्धन सिंह सहित अनेक किसान नेता मंच पर मौजूद रहे। सभा में वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसानों की हक की लड़ाई का नया अध्याय है और तब तक जारी रहेगा जब तक किसानों की आवाज़ को सरकार तक न्यायपूर्वक नहीं पहुंचाया जाता।

 प्रशासन ने दिया आश्वासन

ज्ञापन प्राप्त करने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी सभी मांगों को उच्चाधिकारियों तक भेजा जाएगा और फसल नुकसान का सर्वे शीघ्र करवाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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