मुफ़्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही ‘सब्ज़पोश अवॉर्ड’ से नवाज़े गए, समाज और तालीम की खिदमतों को मिला बड़ा एहतिराम

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का मशहूर सब्ज़पोश ख़ानदान अपने समाजी कामों, ज़मीदारी और सूफ़ी-संतों की विरासत की वजह से मुल्क और बाहर की दुनिया में एक खास पहचान रखता है। इसी परिवार के “सब्ज़पोश हाउस” नज़दीक मस्जिद ज़ाफ़रा बाज़ार के मैदान में आयोजित ‘मोहसिने आज़म कॉन्फ्रेंस’ में इस बार राजस्थान के शेरानी आबाद से ताल्लुक़ रखने वाले मशहूर आलिम-ए-दीन, तालीमी रहनुमा और समाजसेवी मुफ़्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही शेरानी को ‘सब्ज़पोश अवॉर्ड’ से नवाज़ा गया।

उन्हें यह अवॉर्ड उनकी बहुमुखी सेवाओं के ऐतराफ़ में दिया गया। मौके पर उन्हें सर्टिफिकेट, शील्ड और फूलों का गुलदस्ता पेश कर सम्मानित किया गया। अवॉर्ड में दर्ज किया गया कि मुफ़्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही ने नौजवानों के बीच अपनी गहरी इल्मी शख़्सियत, तालीमी पहल और इंसानियत की खिदमत से खास पहचान बनाई है।

मुफ़्ती साहब की खिदमतें

तसनीफ़ व तर्जुमा (लेखन और अनुवाद) : अब तक तीन दर्जन से ज़्यादा किताबें लिखीं और तक़रीबन एक दर्जन अहम किताबों का हिंदी तर्जुमा किया।

तालीमी और तंजी़मी काम : 2019 से उनकी संस्था “तहरीक उलमा-ए-हिंद” काम कर रही है, जिसके ऑनलाइन और ऑफ़लाइन इंस्टीट्यूट्स में 80 उस्तादों की निगरानी में तक़रीबन 1506 तालिब-ए-इल्म तालीम हासिल कर रहे हैं। ख़ास बात यह है कि उन्होंने बेटियों के लिए घर बैठे ऑनलाइन तालीम का इंतज़ाम किया।

आईक्यू ट्रस्ट : इस ट्रस्ट के ज़रिये नौजवानों की क़ाबिलियत और रहनुमाई पर काम हो रहा है।

सियासी और समाजी किरदार : राजस्थान की कांग्रेस हुकूमत के दौर में वह राजस्थान उर्दू अकादमी के रुक्न रहे। 2021 में जयपुर में आयोजित “देश बचाओ, संविधान बचाओ कॉन्फ्रेंस” में मॉब-लिंचिंग के खिलाफ़ क़ानून बनाने की मुहिम में उनकी आवाज़ को बड़ी कामयाबी मिली।

इंसानियत और खिदमत : न सिर्फ़ हिंदुस्तान बल्कि बाहर के मुल्कों में भी उन्होंने खिदमत का सबूत दिया। सीरिया जंग के दौरान जॉर्डन जाकर वहां के शरणार्थियों तक राशन पहुंचाया। उनकी संस्था ‘तहरीक उलमा-ए-हिंद’ यतीम बच्चों की कफ़ालत, तलबा की फीस अदा करने और रहनुमाई करने जैसे नेक काम जारी रखती है।

अपने खिताब में मुफ़्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही ने कहा –
“यह एज़ाज़ मेरे लिए नहीं, बल्कि उस सोच और तालीम के लिए है, जिसे मैं समाज तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा हूं। क़ुरआन और पैग़ंबर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की तालीमात पर अमल करके ही समाज से बुराइयों को ख़त्म किया जा सकता है। पैग़ंबर-ए-इस्लाम ने औरतों को इज़्ज़त दी और बेटियों के हक़ को यक़ीनी बनाया। आज भी इंसानियत के लिए सबसे बड़ी राहनुमाई इन्हीं तालीमात में मौजूद है।”

कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोगों ने मुफ़्ती साहब की इल्मी, तालीमी, समाजी और रूहानी खिदमतों की दिल से तारीफ़ की और दुआ की कि वह इसी तरह उम्मत और इंसानियत की रहनुमाई करते रहें।

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