डीडवाना के समाजसेवी और ट्रांसपोर्ट व्यवसायी मोहम्मद शरीफ खत्री को अब क्षेत्र में दानवीर शरीफ भाई के नाम से पहचाना जाता है । ये नाम यूं ही नहीं मिला, शरीफ भाई ने अपने प्राणी प्रेम और गौ सेवा से समाज में नई इबारत लिखी है। इंसानियत और सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अब तक 25 लाख रुपये से अधिक की राशि गौशालाओं को समर्पित की है। उनके इस त्याग और दरियादिली की सराहना करते हुए नागौर की जानी-मानी संस्था सैनी क्षत्रिय (माली) संस्थान ने उन्हें स्मृति चिन्ह, शॉल और साफा पहनाकर सम्मानित किया।

परिवार से मिली सेवा की विरासत
शरीफ भाई प्रसिद्ध मूंशी मोटर्स, डीडवाना के मालिक हाजी असगर अली खत्री के पुत्र हैं। उनके पिता अपने समय के जाने-माने भामाशाह और समाजसेवी थे। पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए शरीफ भाई ने भी इंसानियत और सेवा को अपना जीवन मकसद बना लिया।

गौशालाओं के लिए खुले दिल से सहयोग
शरीफ भाई अब तक 25 लाख रुपये से अधिक गौ सेवा के नाम कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने सांवराद गौशाला और नागौर की विश्व प्रसिद्ध श्रीकृष्ण गौशाला ताऊसर को पाँच लाख एक हजार रुपये दान दिए। गौ सेवा के लिए उनकी यह तत्परता हमेशा चर्चा का विषय रहती है।

हर क्षेत्र में सक्रिय योगदान
सिर्फ गौ सेवा ही नहीं, बल्कि शरीफ भाई खेल, पर्यावरण और जरूरतमंदों की मदद में भी हमेशा आगे रहते हैं। उनके निवास स्थान पर वर्षों से कबूतरखाना चलता आ रहा है, जहाँ सैकड़ों कबूतरों की देखभाल होती है। यही नहीं, वे समय-समय पर ज़रूरतमंदों और पीड़ितों की आर्थिक सहायता भी करते रहते हैं।

संस्थान ने जताई प्रशंसा
सम्मान समारोह में सैनी क्षत्रिय माली संस्थान के अध्यक्ष कृपाराम देवड़ा ने कहा—“शरीफ भाई कई वर्षों से हमारे साथ जुड़े हुए हैं। प्रदेश की किसी भी गौशाला में जब भी चारे की ज़रूरत होती है, वे तुरंत ट्रक भेजने का वादा निभाते हैं। उनका प्राणी प्रेम वाकई लाजवाब है और वे हर धर्म, जाति और समाज की मदद को तैयार रहते हैं।”
