कुचामन सिटी में जैन समाज की भावी पीढ़ी को संस्कारवान एवं धर्म से जुड़ा रखने के उद्देश्य से संचालित जैन पाठशाला, नागोरी मंदिर जी, पुरानी धान मंडी में हर सप्ताह के अंतिम दो दिवस विशेष कक्षाएं लगाई जाती हैं। इस पाठशाला में लगभग 50 बच्चे 5 वर्ष से लेकर 19 वर्ष तक नियमित अध्ययन कर जैन धर्म की गूढ़ शिक्षाओं को आत्मसात कर रहे हैं।

इसी क्रम में दसलक्षण पर्व के नवें दिन, उत्तम आकिंचन पर्व के उपलक्ष्य में पाठशाला द्वारा एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पाठशाला के वरिष्ठ वर्ग के विद्यार्थियों ने “पुरुरवा भील के महावीर बनने की यात्रा” नाटक का मंचन किया। नाटक का संदेश यह था कि यदि कोई भी साधक अपने संकल्प, व्रत और नियमों पर अडिग रहता है तो उसका जीवन कल्याणकारी बन सकता है, जैसे पुरुरवा भील ने तप और नियम के बल पर भगवान महावीर का स्वरूप धारण किया

कार्यक्रम में बच्चों ने नाटक के साथ-साथ नृत्य, भजन, भाषण और कविताओं की भी शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया।
पाठशाला की वार्षिक परीक्षा श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर के निर्देशन में जनवरी माह में आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में सफल सभी परीक्षार्थियों को इस अवसर पर गुणमाला देवी व कमल कुमार जी पांड्या के सौजन्य से प्रमाण पत्र और पारितोषिक प्रदान किए गए।

कार्यक्रम का मंच संचालन अजय कुमार जी जैन (शास्त्री) ने किया। अंत में पाठशाला के शिक्षकों ने समाज के सभी परिवारों से आग्रह किया कि वे अपने 5 से 19 वर्ष तक के बच्चों को जैन पाठशाला भेजकर उन्हें संस्कारवान बनाएं और धर्म से जोड़ें।
