अखिल भारतीय सांगलिया धूणी में भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर दो दिवसीय वार्षिक लक्खी मेले का भव्य आयोजन हुआ। मेले में देश-प्रदेश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और बाबा लक्कड़ दास महाराज की समाधि पर शीश नवाकर आशीर्वाद लिया।

मेले का शुभारंभ शनिवार को धूणी पीठाधीश्वर स्वामी ओमदास महाराज के परम सानिध्य में हुआ। रात सवा नौ बजे से सत्संग और विशाल भजन संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें साधु-संतों और कलाकारों ने भक्ति रस से सरोबार प्रस्तुतियां देकर माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। अगले दिन समाधि पूजन के बाद महाआरती और महाप्रसादी का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

भजन संध्या में ओमप्रकाश जाना, रामोतार-सुरेंद्र मारवाड़ी, सीमा राजकुमार स्वामी, अनजी-धनजी, नेमीचंद राठी भांगीवाद, सूर्यनाथ महाराज, केशव दास महाराज, कृष्ण दास महाराज, जगदीश सांगलिया, प्रकाश खटीक, भागीरथ कावा, इकबाल खान लोसल, रामाकिशन सहित अनेक कलाकारों ने भक्ति गीत प्रस्तुत किए। वहीं साधु-संतों में ओमदास अडकसर, केशवदास सुजानगढ़, श्रवणदास सुतोद, प्रतापदास बिठुड़ा, किशनदास परसरामपुरा, कानदास बाय, बलबीरदास मंडावरा, भेरदास रोडू, जग्गूदास कुमास, नोपदास चावण्डिया सहित कई महात्माओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

मेले में श्रद्धालुओं के लिए मिठाई, फास्ट फूड, खिलौने, कृषि औजार, घरेलू सामान, रेडीमेड वस्त्र, कॉस्मेटिक व आर्टिफिशियल ज्वेलरी की हजारों दुकानें और स्टॉल सजाए गए। बच्चों के मनोरंजन हेतु बड़े-बड़े झूले भी लगाए गए, जिससे मेले का उत्साह और बढ़ गया।
सांगलिया धूणी की स्थापना करीब साढ़े चार सौ साल पूर्व अघोरी संत बाबा लक्कड़ दास महाराज ने तपस्या स्थल के रूप में की थी। हर वर्ष उनकी बरसोदी पर लाखों श्रद्धालु इस लक्खी मेले में भाग लेकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस बार भी मेले में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु, असम सहित विभिन्न राज्यों से साधु-संतों और श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

इस अवसर पर बाबा खींवादास स्नातकोत्तर महाविद्यालय सांगलिया के एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों ने भी अपनी सेवाएं देकर अनुकरणीय योगदान दिया।
