“थोपे गये सभापति का शपथग्रहण, कुचामन के इतिहास पर काला धब्बा” – हेमराज चावला

कुचामन सिटी नगर परिषद में हाल ही में हुए सभापति परिवर्तन को लेकर सियासत गरमा गई है। उपसभपति रहे हेमराज चावला ने भाजपा पार्षद सुरेश सिखवाल के शपथग्रहण को कुचामन के इतिहास का “काला अध्याय” करार दिया है।

“पहली बार सत्ता के बल पर अस्थिर हुआ निर्वाचित बोर्ड”

हेमराज चावला ने कहा कि नगर परिषद का गठन 1954 में हुआ था और तब से लेकर अब तक कांग्रेस और भाजपा दोनों के कई बोर्ड बने। लेकिन अब तक किसी भी सत्तारूढ़ दल ने निर्वाचित बोर्ड को राजनीतिक दुर्भावना से अस्थिर करने या चेयरमैन/वाइस चेयरमैन को झूठे आरोपों में हटाने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बार सत्ता के दबाव में झूठी शिकायतों को आधार बनाकर बहुमत से चुने गए सभापति-उपसभापति को हटाया गया और भाजपा पार्षद सुरेश सिखवाल को थोपकर शपथ दिलाई गई।

“पूर्व जनप्रतिनिधियों ने हमेशा लोकतंत्र का सम्मान किया”

चावला ने याद दिलाया कि क्षेत्र के पूर्व विधायक स्व. किशनलाल शाह, स्व. हनुमान सिंह चौधरी, स्व. रामेश्वरलाल चौधरी , स्व. हरीशचंद्र कुमावत और पूर्व विधायक व उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी ने कभी भी नगरपालिका या पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित चेयरमैन, उपसभापति या पंच-प्रधान को राजनीतिक द्वेष से हटाने में रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान किया और चुनी हुई संस्थाओं को मजबूत करने का ही काम किया।

राजनीतिक स्वार्थों की नई और खतरनाक परंपरा”

चावला ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि मौजूदा समय में तुच्छ राजनीतिक स्वार्थों और दलगत प्रतिद्वंद्विता के चलते लोकतांत्रिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। यह प्रवृत्ति लोकतंत्र के लिए घातक है और एक गलत परंपरा की शुरुआत है, जिसे कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता।

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