11 हजार णमोकार मंत्रों के जाप से गूंजा कुचामन, विश्व णमोकार दिवस पर उमड़ा आस्था का सैलाब

विश्व णमोकार दिवस के अवसर पर कुचामन शहर में जैन समाज द्वारा 11 हजार णमोकार मंत्रों के सामूहिक जाप के साथ भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। पीएमश्री राजकीय जवाहर विद्यालय से उपाध्याय मुनिराज विकसंत सागरजी महाराज (5 पीच्छी) का भव्य मंगल प्रवेश जुलूस के रूप में जैन भवन तक कराया गया। शोभायात्रा में महिलाओं ने एक समान साड़ी पहनकर मंगल कलश धारण किए और जयकारों से माहौल भक्तिमय बना दिया।

बरखा रानी पाटनी ने बताया कि विश्व णमोकार दिवस को विशेष महत्व देते हुए समाज द्वारा 11 हजार मंत्रों का सामूहिक जाप किया गया, जो आत्मशुद्धि और विश्व शांति का संदेश देता है।

वहीं सुभाष पहाड़िया ने जानकारी दी कि इस आयोजन में बड़ी संख्या में समाजजनों ने भाग लेकर सामूहिक रूप से णमोकार मंत्र का जाप किया, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।
उपाध्यायश्री ने अपने प्रवचनों में णमोकार मंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि यह जैन धर्म का सबसे महान मंत्र है, जिसमें किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि गुणों की वंदना की जाती है। इसमें पंच परमेष्ठी—अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और सभी साधु-साध्वियों की स्तुति की गई है। यह मंत्र आत्मा की शुद्धि, पापों के क्षय और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का माध्यम है।

णमोकार मंत्र इस प्रकार है—
णमो अरिहंताणं
णमो सिद्धाणं
णमो आयरियाणं
णमो उवज्झायाणं
णमो लोए सव्व साहूणं

इसका भावार्थ है कि हम उन सभी श्रेष्ठ आत्माओं को नमन करते हैं जिन्होंने आत्मकल्याण का मार्ग दिखाया। जैन धर्म में इसे नवकार मंत्र भी कहा जाता है और इसकी विशेषता यह है कि यह सार्वभौमिक शांति और मोक्ष का मार्ग दर्शाता है।

कार्यक्रम के दौरान चित्र अनावरण व दीप प्रज्वलन का पुण्यार्जन नेहरू राजकुमार और सुमति पहाड़िया ने किया, जबकि शास्त्र भेंट का सौभाग्य पवन कुमार व ऋतु राज गोधा (मारोठ) को प्राप्त हुआ।


उपाध्याय मुनिराज के सानिध्य में जैन भवन में प्रतिदिन सुबह 8 बजे प्रवचन, 10 बजे आहारचर्या, दोपहर 3:30 बजे शंका समाधान तथा शाम 6:30 बजे आनंद यात्रा व आरती का आयोजन किया जाएगा।

error: News 1 Rajasthan