नागौर जिले के मेड़ता सिटी के निवासी मोहम्मद इरफान कायमखानी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 646वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार, शहर और समाज का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों और संघर्ष भरी परिस्थितियों के बीच पले-बढ़े इरफान की यह उपलब्धि युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
इरफान मेड़ता सिटी निवासी इशाक खान खोखर और माता बिल्किस बानो के पुत्र हैं। उनके पिता मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद इरफान ने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया और लगातार मेहनत के दम पर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC में सफलता हासिल कर ली।

बहन-बहनोई का मिला मजबूत सहारा
इरफान की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा है। विशेष रूप से उनकी बड़ी बहन जैनब बानो और बहनोई बूंदू खान ने पिछले 17 वर्षों से उनका हर कदम पर साथ दिया। इरफान अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र के राजास में बहन-बहनोई के साथ रहने लगे और वहीं से अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाया।
पढ़ाई का सफर
इरफान ने केजी से 5वीं तक की पढ़ाई मेड़ता सिटी में की। इसके बाद वे अपनी बड़ी बहन जैनब बानो और बहनोई बूंदू खान के पास लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र के राजास चले गए, जहां से उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखी। 6वीं से 10वीं तक सीजीपीएस स्कूल लक्ष्मणगढ़, 11वीं-12वीं प्रिंस स्कूल सीकर से की। आगे चलकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की तथा जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU) से पीएचडी भी की।
UPSC की तैयारी उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया के मार्गदर्शन और स्वयं अध्ययन के माध्यम से की। चार प्रयासों के लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। इससे पहले वे दो बार प्रीलिम्स भी क्लियर कर चुके थे, लेकिन चौथे प्रयास में प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू तीनों चरण पार कर अंतिम सूची में स्थान बनाया।
परिवार की झलक
इरफान दो भाइयों और चार बहनों के परिवार से आते हैं। बड़े भाई सदाम खान मजदूरी करते हैं। बड़ी बहनों में फिरदोश बानो ,जैनब बानो और यास्मीन बानो हैं, जबकि छोटी बहन हिना बानो है। उनके दादा का नाम करीम खान, दादी का नाम सायरा बानो है । इरफान के नाना का नाम नैनू खान तथा नानी का नाम कलसुम बानो है, जो छावटा निवासी हैं।
संघर्ष ने सिखाया कभी हार न मानना -इरफान कायमखानी
अपनी सफलता पर इरफान ने कहा कि यह सफर आसान नहीं था, लेकिन परिवार के विश्वास और निरंतर मेहनत ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा और यही मेहनत आज रंग लाई है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, बहन-बहनोई और सभी शुभचिंतकों को दिया।

हमारे लिए 646वीं रैंक भी नंबर-1 के बराबर – बहन जैनब बानो और बहनोई बूंदू खान
इरफान की बड़ी बहन जैनब बानो और बहनोई बूंदू खान ने कहा कि उनकी नजर में इरफान की 646वीं रैंक भी किसी भी मायने में रैंक-1 से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि इरफान पिछले 17 वर्षों से उनके साथ रहकर पढ़ाई कर रहा था और शुरू से ही मेहनती और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहा है।
अल्लाह ने दुआ कबूल की, मेहनत का फल हमेशा मिलता है – पिता इशाक खान
इरफान के पिता इशाक खान ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने मजदूरी कर अपने परिवार की परवरिश की और हमेशा यही चाहा कि बच्चे मेहनत से आगे बढ़ें। आज बेटे की सफलता ने उनकी सारी मेहनत को सार्थक कर दिया है और पूरा परिवार इस उपलब्धि से बेहद खुश है।
इरफान की सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा – गुलाम नबी आजाद
डीडवाना-कुचामन जिले के खारिया निवासी और सामाजिक संस्था वर्ल्ड पीस हार्मनी के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने इरफान कायमखानी को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता संघर्ष, मेहनत और लगन की मिसाल है। उन्होंने कहा कि इरफान की उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने की प्रेरणा देगी।

समाज से मिली दुआएं
इरफान की इस सफलता पर हाजी मुकारब खान, जग्गू खान, शरीफ खान, समाजसेवी बरकत खान और अजीज खान (जयपुर) सहित कई लोगों ने भी शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
