रहमतों के साए में नन्ही इशरा का पहला रोज़ा, घरवालों से मिली दुआएं और मुबारकबाद

कुचामन सिटी निवासी मोहम्मद इदरीस रंगरेज की छह वर्षीय मासूम बेटी इशरा रंगरेज ने मुकद्दस रमज़ान माह के 11वें दिन, रविवार को अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा रखकर परिवार को खुशी और सुकून से भर दिया। छोटी सी उम्र में इबादत का यह जज़्बा पूरे परिवार के लिए एक यादगार लम्हा बन गया।

रमज़ान की बरकतों भरी फिज़ा में इशरा ने सुबह सहरी के वक्त उत्साह के साथ हिस्सा लिया। परिवार के बड़ों ने प्यार से रोज़े की अहमियत समझाई कि यह सिर्फ भूख-प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि सब्र, शुक्र और नेकियों की राह अपनाने का पैगाम है। नन्ही इशरा ने पूरे दिन हिम्मत और मासूम मुस्कान के साथ रोज़ा रखा। दिन में उसने घरवालों के साथ इबादत की । रविवार होने के कारण घर में खास रौनक देखने को मिली। इफ्तार से पहले ही घर का माहौल रूहानी एहसास से भर गया। जैसे ही इफ्तार का वक्त हुआ इशरा ने खजूर से अपना पहला रोज़ा खोला। इस खास मौके पर परिवारजनों ने उसे गले लगाकर मुबारकबाद दी, माला पहनाई ,मिठाई खिलाई और उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए दुआएं कीं।

पिता मोहम्मद इदरीस रंगरेज ने बताया कि इशरा ने खुद शौक से रोज़ा रखने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा कि बच्चों को अगर प्यार और समझाइश के साथ दीन की बातें सिखाई जाएं तो वे खुद इबादत की ओर आकर्षित होते हैं। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इशरा की हिम्मत और लगन की सराहना की।

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