कुचामन सिटी के गुलाब बाड़ी क्षेत्र में रविवार को एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब कासिम रंगरेज की पाँच वर्षीय बेटी आलिजा रंगरेज ने रमजान माह के चौथे रोजे के दिन अपने जीवन का पहला रोजा रखा। इतनी छोटी उम्र में इबादत के प्रति यह लगन पूरे परिवार और मोहल्ले के लिए गर्व का क्षण बन गई।
सुबह सहरी के समय घर में खास तैयारी की गई। आलिजा भी परिवार के साथ उत्साहपूर्वक जागी और रोजा रखने की नीयत की। परिजनों ने उसे समझाया कि रोजा सब्र, अनुशासन और अल्लाह की इबादत का प्रतीक है। नन्ही आलिजा ने पूरे आत्मविश्वास के साथ दिनभर रोजा निभाने का संकल्प लिया।

दिन के दौरान आलिजा ने अपने मासूम अंदाज़ में इबादत में हिस्सा लिया। कभी नमाज के वक्त घरवालों के साथ खड़ी हो जाती, तो कभी दुआ के लिए अपने छोटे-छोटे हाथ उठाकर अल्लाह से नेक दुआएं मांगती। परिवारजन उसके हौसले को बढ़ाते रहे और उसकी देखभाल करते रहे। भूख-प्यास के बावजूद उसके चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी।
शाम को जैसे ही इफ्तार का समय हुआ, घर में रौनक बढ़ गई। अज़ान के साथ ही आलिजा ने खजूर और पानी से अपना पहला रोजा खोला। उस पल घर में दुआओं की गूंज सुनाई दी। परिवारजनों ने फूल-मालाओं से उसका स्वागत किया, मिठाई खिलाई और उसे प्यार से गले लगाकर हौसला अफजाई की।

इस अवसर पर पिता कासिम रंगरेज ने कहा कि बच्चों में छोटी उम्र से ही अच्छे संस्कार और धार्मिक भावना का होना परिवार के लिए खुशी की बात है। उन्होंने बताया कि आलिजा का पहला रोजा उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा।
आलिजा रंगरेज का यह पहला रोजा न केवल उसके परिवार के लिए विशेष रहा, बल्कि गुलाब बाड़ी क्षेत्र में भी चर्चा का विषय बना रहा। लोगों ने इसे नई पीढ़ी में बढ़ती आस्था और संस्कारों की सुंदर मिसाल बताया।
