कुचामन सिटी में रमजान की रौनक के बीच एक ऐसी प्यारी तस्वीर सामने आई जिसने हर किसी के चेहरे पर मुस्कान ला दी। शहर के निवासी यूसुफ जिन्दरान के महज पाँच वर्षीय बेटे आहिल जिन्दरान ने चौथे रोजे के दिन रविवार को अपने जीवन का पहला रोजा रखकर सबको प्रभावित किया। इतनी छोटी उम्र में इबादत के प्रति यह लगाव लोगों के लिए सुखद आश्चर्य का विषय बन गया।

सुबह जब घर में सहरी की तैयारियां चल रही थीं, तब आहिल भी अपने परिवार के साथ जाग गया। किसी ने उस पर रोजा रखने का दबाव नहीं डाला, बल्कि उसने खुद जिद कर कहा कि वह भी रोजा रखेगा। पहले तो घरवालों ने उसे समझाया कि अभी वह बहुत छोटा है, लेकिन उसके मासूम जज़्बे और उत्साह को देखकर आखिरकार सभी ने उसका साथ दिया।
दिनभर आहिल ने अपने तरीके से रोजे की अहमियत समझने की कोशिश की। कभी वह नमाज के वक्त अब्बू के पास खड़ा हो जाता, तो कभी घर में बैठकर दुआ के लिए हाथ उठा देता। बीच-बीच में उसकी मासूम बातें परिवार के चेहरों पर मुस्कान ले आतीं, लेकिन उसके इरादे में कोई कमी नहीं आई।

आहिल ने भूख और प्यास को भूलकर ,हिम्मत रखते हुए रोजा पूरा किया । शाम को जैसे-जैसे इफ्तार का वक्त करीब आया, घर का माहौल खुशी से भर गया। इफ्तार के वक्त होने के साथ ही आहिल ने खजूर से अपना पहला रोजा खोला। परिवार के सदस्यों ने आहिल को गले लगाकर प्यार दिया, फूलों से स्वागत किया और उसकी हौसला अफजाई की।
