कुचामन सिटी के कृषि मंडी क्षेत्र के निवासी हुसैन लीलगर नेता के सात वर्षीय बेटे मोहम्मद आबिद ने रमजान के पाक महीने में अपना पहला रोजा रखकर परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। छोटी सी उम्र में इतना बड़ा संकल्प लेना हर किसी के लिए प्रेरणादायक बन गया।
सुबह सहरी के वक्त घर में रूहानी माहौल था। परिवार के सदस्यों ने आबिद को जगाया। उसने पूरे उत्साह के साथ सहरी की और रोजा रखने की नीयत की। दादा हाजी अहमद लीलगर ने उसे दुआ देते हुए कहा कि रोजा इंसान को सब्र, परहेज़गारी और इंसानियत का पाठ पढ़ाता है। उन्होंने आबिद को समझाया कि रोजा केवल भूख-प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और सोच को बेहतर बनाने का माध्यम है।

दिनभर मोहम्मद आबिद ने पूरे हौसले और संयम के साथ रोजा रखा। कभी कुरआन शरीफ की तिलावत की, तो कभी घर के बड़ों के साथ नमाज में शामिल हुआ। परिवारजन समय-समय पर उसका उत्साह बढ़ाते रहे। इतनी कम उम्र में उसके चेहरे पर थकान से ज्यादा संतोष और इबादत की चमक दिखाई दे रही थी।
शाम को इफ्तार से पहले पूरे घर में खुशी का माहौल था। जैसे इफ्तार का वक्त हुआ आबिद ने खजूर से अपना पहला रोजा खोला। इसके बाद परिवार ने मिलकर इफ्तार किया और मग़रिब की नमाज अदा की। रोजा मुकम्मल होने पर घरवालों ने फूल-मालाओं से उसका स्वागत किया और मिठाई खिलाकर उसकी हौसला अफजाई की।

इस अवसर पर दादा हाजी अहमद लीलगर भावुक होकर बोले, “आज हमें अपने पोते पर बेहद गर्व है। अल्लाह इसे नेक राह पर कायम रखे और इसे कामयाबी अता फरमाए। छोटी उम्र में दीन के प्रति लगाव बहुत बड़ी नेमत है।”
मोहम्मद आबिद का पहला रोजा न केवल उसके परिवार के लिए यादगार पल बना, बल्कि क्षेत्र के लोगों के लिए भी प्रेरणा का संदेश दे गया।
