राजस्थान कांग्रेस शिक्षक प्रकोष्ठ जिला डीडवाना–कुचामन ने मनरेगा योजना के मौजूदा प्रावधानों को यथावत रखने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिला कलक्टर डॉ. महेंद्र खड़गावत को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किए जा रहे बदलावों पर गहरी आपत्ति जताते हुए इसे ग्रामीण मजदूरों के हितों के खिलाफ बताया गया।

ज्ञापन में बताया गया कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत केंद्र सरकार की 90 प्रतिशत और राज्य सरकार की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी का प्रावधान था। इसके साथ ही ग्राम सभा और ग्राम पंचायतों को स्थानीय स्तर पर रोजगार चयन का अधिकार प्राप्त था, जिससे जरूरतमंद मजदूरों को मांग के आधार पर तुरंत काम उपलब्ध कराया जाता था। इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सुरक्षा मजबूत हुई और पलायन पर भी अंकुश लगा।

शिक्षक प्रकोष्ठ ने आरोप लगाया कि वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबीजी रामजी)’ किए जाने के साथ-साथ इसके मूल प्रावधानों में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं। संगठन का कहना है कि इन बदलावों से पंचायतों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं, स्थानीय स्वायत्तता प्रभावित हो रही है और मजदूरों की सौदेबाजी की ताकत भी घट रही है। साथ ही व्यय हिस्सेदारी को बदलकर राज्य सरकार पर 40 प्रतिशत और केंद्र पर 60 प्रतिशत का भार डालना भी अनुचित बताया गया।
ज्ञापन के जरिए राष्ट्रपति से यह मांग की गई कि केंद्र सरकार को निर्देशित किया जाए कि मनरेगा के नाम और उसके मूल स्वरूप को यथावत रखा जाए तथा वर्ष 2025 में पारित किए गए वीबीजी रामजी प्रावधानों को वापस लिया जाए, ताकि ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की गारंटी और पंचायतों को उनके अधिकार सुरक्षित रह सकें।

इस मौके पर शिक्षक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष हरलाल पूनिया, प्रदेश सचिव रामनिवास खोखर, ब्लॉक अध्यक्ष डीडवाना निसार अहमद सिद्दीकी, खाटू ब्लॉक अध्यक्ष शिवराम डूडी, लाडनूं ब्लॉक अध्यक्ष संतोष कुमार भोजक सहित हनुमान राम कच्छावा, रामनिवास थोरी, तिलोका राम पूनिया, जेठाराम जांगिड़, दुलाराम, बिरदाराम, चेनाराम मंडा, महावीर प्रसाद, छिगनाराम, भंवरलाल फुलवारिया, सैयद इमरान अली, बुन्दू खां सहित अनेक कांग्रेसजन मौजूद रहे।
