कुचामन नगर परिषद की 27 जनवरी 2026 को आयोजित अंतिम बोर्ड बैठक को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस पार्षद दल ने भाजपा पर अल्पमत में होने के बावजूद प्रस्तावों को बहुमत से पारित बताने का आरोप लगाते हुए इसे गैरकानूनी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ करार दिया है। कांग्रेस पार्षद दल के फजलुर्रहमान कुरैशी, सम्पत देवी चावला, सुभाष पावड़िया और जवानाराम ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि बैठक में नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई और जनता को गुमराह किया गया।

नियमों की अनदेखी का आरोप
कांग्रेस पार्षदों ने बताया कि राजस्थान नगर पालिका कार्य संचालन नियम 2009 की धारा 51(1) और 51(3) के अनुसार मण्डल बैठक आहूत करने के लिए एक-तिहाई सदस्यों तथा बैठक में प्रस्ताव पारित कराने के लिए उपस्थित सदस्यों में से दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। इसके बावजूद बैठक में भाजपा अल्पमत में थी और कांग्रेस पार्षद दल के सदस्य संख्या में अधिक मौजूद थे। इसके बाद भी प्रस्तावों को बहुमत से पारित बताया जाना नियमों का सीधा उल्लंघन है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बैठक के दौरान उपस्थिति पंजिका सभापति और आयुक्त की निगरानी में रखी गई और कई सदस्यों के हस्ताक्षर तक नहीं कराए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
एजेंडे पर चर्चा के बिना बैठक समाप्त करने का आरोप
कांग्रेस पार्षद दल ने बताया कि 27 जनवरी की अंतिम बैठक की कार्यसूची में कुल सात प्रमुख बिंदु शामिल थे। नियमों के अनुसार पहले बिंदु पर विस्तृत चर्चा होनी थी, लेकिन मनोनीत सभापति सुरेश सिखवाल ने सीधे ‘हाँ’ या ‘ना’ के आधार पर निर्णय कराने का प्रयास किया। जब सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई तो बिना मण्डल के निर्णय के ही शेष बिंदुओं को पढ़े बिना बैठक को अचानक समाप्त घोषित कर दिया गया। इसके बाद सभापति भाजपा सदस्यों के साथ सदन से उठकर बाहर चले गए और बाद में मीडिया के माध्यम से प्रस्तावों के पारित होने की घोषणा कर दी गई, जिसे कांग्रेस ने साजिशन और अलोकतांत्रिक बताया।

कांग्रेस पार्षद दल के वरिष्ठ सदस्य फजलुर्रहमान कुरैशी ने कहा कि यदि भाजपा के पास वास्तव में बहुमत होता तो उन्हें बैठक छोड़कर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वे सभी बिंदुओं पर चर्चा कराकर नियमों के तहत प्रस्ताव पारित करा सकते थे।
महिला पार्षद और कांग्रेस नेता संपति देवी चावला ने कहा कि नगर परिषद जैसी संवैधानिक संस्था में इस तरह की जल्दबाजी और मनमानी लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती है। जनता के मुद्दों पर चर्चा से भागना जनहित के साथ धोखा है।
कांग्रेस पार्षद सुभाष पावड़िया और पार्षद जवानाराम ने आरोप लगाया कि बैठक को जानबूझकर विवादित बनाया गया ताकि बिना चर्चा के प्रस्तावों को थोपने का रास्ता साफ हो सके। यह तरीका न केवल अवैध है बल्कि परिषद की गरिमा के भी खिलाफ है।
जनहित के मुद्दों पर कांग्रेस का रुख
कांग्रेस पार्षद दल ने स्पष्ट किया कि वे कस्बे की यातायात व्यवस्था सुधारने, अवैध अतिक्रमण हटाने और विकास कार्यों के पक्ष में हैं, लेकिन किसी भी जनविरोधी प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय या अत्याचार हुआ तो कांग्रेस आंदोलन के माध्यम से सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
कांग्रेस पार्षद दल ने जिला कलेक्टर और स्वायत्त शासन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि 27 जनवरी 2026 को अलोकतांत्रिक तरीके से पारित बताए जा रहे प्रस्तावों को तत्काल निरस्त घोषित किया जाए
श्यामलाल बागड़ा, शाहरूख बडगुजर, बून्दू अली, मोहम्मद फारूख, समंदर, संजना, सुमन, संतोष देवी, अंकित कुमार, फूलचन्द, ललिता वर्मा, अब्दुल फैशल, अयुब तेली, बसो बानो, शाहीन कुरैशी, नजराना खानम, इकराम भाटी और नाजिया खान ने भी इस प्रस्तावों का विरोध जताया हैं।
कुल मिलाकर कुचामन नगर परिषद की अंतिम बैठक में मनोनीत सभापति के रूप में शामिल हुए सुरेश सिखवाल और आयुक्त शिकेश कांकरिया की तानाशाही की भूमिका को लेकर विवाद गहराता जा रहा है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर और तूल पकड़ सकता है।
