कुचामन नगर परिषद की मंगलवार को आयोजित अंतिम बैठक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। नगर परिषद के पूर्व उप सभापति हेमराज चावला और नगर कांग्रेस अध्यक्ष सुतेन्द्र सारस्वत ने बैठक में तथाकथित मनमाने और जनविरोधी प्रस्तावों को अल्पमत में होने के बावजूद पारित कराने के प्रयास को कड़ा शब्दों में निंदनीय बताया है। दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान जारी करते हुए आरोप लगाया कि परिषद के समाप्त हो रहे कार्यकाल के ठीक एक दिन पहले आयोजित बैठक में जल्दबाजी में प्रस्ताव पारित कराने की कोशिश आगामी निकाय चुनावों से पहले क्षेत्र में धार्मिक उन्माद और साम्प्रदायिक सोच पर आधारित माहौल बनाने की साजिश का हिस्सा प्रतीत होती है।

हेमराज चावला और सुतेन्द्र सारस्वत ने कहा कि कुचामन कस्बा पीढ़ियों से आपसी भाईचारे, मेलजोल और सौहार्द की मिसाल रहा है। यहां अब तक जिस तरह का धार्मिक उन्मादी माहौल कभी नहीं बना, वैसी स्थिति पैदा करने का प्रयास किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिषद की बैठक में पारित कराने का प्रयास किए गए प्रस्तावों का उद्देश्य जनहित नहीं, बल्कि राजनीतिक लाभ उठाना है।
उन्होंने बताया कि विनायक कॉम्प्लेक्स से शिव मंदिर तक, अंबेडकर सर्किल से लुहारिया बास होते हुए गौशाला तक मार्ग तथा सब्जी मंडी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाकर सड़क चौड़ीकरण और मंडी स्थानांतरण जैसे प्रस्तावों की कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं है। इन क्षेत्रों में अधिकांश मकान और प्रतिष्ठान पट्टाशुदा हैं। यदि कहीं सीढ़ी, छप्पर, टेंट, हाथ ठेला या पटरी जैसी अस्थायी संरचनाएं हैं तो उन्हें पूर्व की भांति समझाइश के माध्यम से हटाया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2018 में राजस्थान राजपत्र में प्रकाशित जीरो सेटबैक व्यवस्था लागू होने के बाद ये सभी क्षेत्र पहले से ही उसकी परिधि में आते हैं, ऐसे में यहां सड़क चौड़ीकरण व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि वास्तव में यातायात व्यवस्था सुधारने और अतिक्रमण हटाकर सड़कों को चौड़ा करने की मंशा है तो नगर परिषद को पहले अपने पुराने अधूरे कार्यों को पूरा करना चाहिए। इसके विपरीत, अंतिम बैठक में जिन क्षेत्रों को प्रस्तावों में शामिल किया गया है, वहां तेलियों की मस्जिद, लुहारों की मस्जिद, जमातखाना, गुर्जर मोहल्ला स्थित भैरूजी मंदिर, रविदास सर्किल, गंगामाता मंदिर, रामदेव मंदिर सहित कई धार्मिक स्थल मौजूद हैं। इसके साथ ही इन इलाकों में दलित वर्ग के रहवासी मकान और प्रतिष्ठान भी स्थापित हैं।

हेमराज चावला और सुतेन्द्र सारस्वत ने आरोप लगाया कि इन प्रस्तावों के जरिए आगामी निकाय चुनाव से पहले धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करने और आमजन को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कुचामन नगर परिषद क्षेत्र के किसी भी धार्मिक स्थल, मकान या प्रतिष्ठान को नाजायज तरीके से तोड़ने या हटाने की कोशिश हुई तो उसका हर स्तर पर क्षेत्रीय आमजन के साथ मिलकर विरोध किया जाएगा।
उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि कुचामन की सामाजिक एकता और भाईचारे को बनाए रखते हुए विकास कार्यों को राजनीति से ऊपर उठकर पारदर्शी और जनहित में किया जाए।
