प्रशासन और शिक्षा विभाग का अभियान बना राजस्थान में मिसाल
नवसृजित डीडवाना–कुचामन जिले ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक नया इतिहास रच दिया है। जिले में पहली बार 1000 से अधिक राजकीय विद्यालयों को भूमि पट्टे जारी किए गए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित कार्यक्रम में संस्था प्रधानों को पट्टे सौंपे गए और पूरे जिले में इस उपलब्धि को अभूतपूर्व माना जा रहा है।
कार्यक्रम में जिला कलेक्टर डॉ. महेंद्र खड़गावत, जिला पुलिस अधीक्षक श्रीमती ऋचा तोमर, एडीएम मोहन लाल, जिला शिक्षा अधिकारी अजीत सिंह, सीबीईओ भंवरलाल, विभिन्न पीईईओ, प्राचार्य और बड़ी संख्या में विद्यालयों के संस्था प्रधान उपस्थित रहे।
अभियान का प्रभाव: वर्षों पुरानी समस्या का समाधान
जिला प्रशासन को पता चला कि जिले के कई विद्यालय बिना भूमि पट्टे के संचालित हो रहे हैं, जिसके चलते भवन निर्माण, खेल मैदान, शौचालय, कक्षा-कक्ष विस्तार और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कठिनाई आ रही थी। इसे गंभीरता से लेते हुए डॉ. महेंद्र खड़गावत ने पूरे जिले में एक विशेष अभियान चलाया।विद्यालयों की सूची तैयार की गई, दस्तावेज़ों की जांच की गई और रिकॉर्ड समय में 1000 से अधिक स्कूलों को कानूनी भूमि अधिकार उपलब्ध कराए गए। इस प्रयास को अब राजस्थान में शिक्षा सुधार के सबसे बड़े मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार: अब नहीं आएगी कोई रुकावट
इस मौके पर आयोजित समारोह में जिला प्रशासन की इस पहल की महत्ता को रेखांकित किया। जिला कलेक्टर डॉ. महेंद्र खड़गावत ने कहा कि सरकारी विद्यालयों को पट्टा मिलने के बाद भवन निर्माण, खेल मैदान, कक्षा-कक्ष विस्तार, शौचालय निर्माण और अन्य जनसुविधाओं के विकास में अब कोई बाधा नहीं आएगी। अब स्कूल राज्य व केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। भूमि का कानूनी अधिकार विद्यालयों के विकास को नई दिशा देगा और बच्चों को बेहतर, सुरक्षित परिसर उपलब्ध कराएगा।
इस ऐतिहासिक सफलता की सराहना करते हुए एडीएम मोहन लाल ने कहा कि यह फैसला केवल प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को मजबूत शिक्षा ढांचा देने की दिशा में निर्णायक कदम है। विकास कार्य अब बिना रुकावट पूरे होंगे, और जिले के बच्चे बेहतर सुविधाओं के साथ पढ़ सकेंगे। यह पहल पूरे राजस्थान के लिए उदाहरण बनेगी।
जिला शिक्षा अधिकारी अजीत सिंह ने कहा कि जिले में 1000 से अधिक स्कूलों को भूमि पट्टे जारी होना राजस्थान में पहली बार हुआ है। यह कदम प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त प्रतिबद्धता का उदाहरण है और इससे विद्यालयों को मिलने वाली योजनाओं तथा निर्माण कार्यों में आ रही समस्याएं खत्म होंगी।
सीबीईओ भंवरलाल खोखर ने बताया कि कुछ सप्ताह पूर्व पता चला कि कई विद्यालय बिना पट्टे के चल रहे हैं। जिला कलेक्टर की पहल पर अध्ययन कर दस्तावेज़ तैयार किए गए और रिकॉर्ड समय में सभी विद्यालयों को भूमि पट्टा उपलब्ध कराया गया। यह उपलब्धि जिले के शिक्षा ढांचे को नई दिशा देगी।”

स्कूलों को मिले पट्टों से शिक्षा व्यवस्था मजबूत, विकास की राह हुई आसान
जिले में संचालित अभियान के तहत विद्यालयों को भूमि पट्टे मिलने से शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिली है और विकास के मार्ग पहले से कहीं अधिक सुगम हो गए हैं। पट्टा जारी होने के साथ ही विद्यालयों में भवन निर्माण का रास्ता साफ हो गया है, जिससे कक्षा-कक्षों का विस्तार अब बिना किसी रुकावट के किया जा सकेगा। खेल मैदान, बाउंड्री वॉल और अन्य जनसुविधाओं के विकास में भी तेजी आने की पूरी संभावना बन गई है।
सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ अब स्कूलों तक तुरंत पहुंच सकेगा, क्योंकि पट्टा मिलने के बाद प्रशासनिक अनुमतियाँ पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल हो जाती हैं। विद्यालयों को कानूनी सुरक्षा प्राप्त होने से लंबे समय से अटके विकास प्रस्ताव भी अब मंज़ूरी की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ेंगे। इस बड़े बदलाव का सबसे सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा, क्योंकि उन्हें सुरक्षित, विस्तृत और आधुनिक शिक्षण वातावरण आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।
