शहर के डूंगरी वाले बालाजी मंदिर में सोमवार को मालपानी परिवार की और से अन्नकूट महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर भगवान बालाजी को छप्पन प्रकार के भोग अर्पित किए गए। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण भक्ति, संगीत और जयघोषों से गूंज उठा।

बालाजी को लगाया छप्पन भोग, हुआ महाआरती और प्रसाद वितरण
अन्नकूट पर्व के अवसर पर मंदिर को सुंदर फूलों, दीपकों और रोशनियों से सजाया गया। भगवान बालाजी को विभिन्न प्रकार के मिष्ठान्न, फल, नमकीन, हलवे, पूरी, खीर, लड्डू सहित 56 व्यंजनों का भोग अर्पित किया गया। महोत्सव के दौरान महाआरती का आयोजन हुआ, जिसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। सैकड़ों भक्तों ने आरती में शामिल होकर भगवान से परिवार और समाज के कल्याण की कामना की।
श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी
इस अवसर पर जगदीश मालपानी, घनश्याम मालपानी, भेरूलाल मालपानी, नटवर लाल और सुशील शर्मा (डॉक्टर साहब) सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन किए और बालाजी के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

“अन्नकूट भक्ति और एकता का प्रतीक” — जगदीश मालपानी
महोत्सव में उपस्थित जगदीश मालपानी ने कहा कि “अन्नकूट केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह समाज में एकता, सेवा और कृतज्ञता का प्रतीक है। भगवान को छप्पन भोग लगाकर हम यह संदेश देते हैं कि ईश्वर का दिया अन्न सबके लिए है और इसे साझा करने में ही सच्ची भक्ति है।” उन्होंने आगे कहा कि इस परंपरा को जीवंत रखना हमारी संस्कृति की जड़ों को मजबूत करता है और नई पीढ़ी को अपने धर्म से जोड़ता है।
अन्नकूट पर्व का महत्व
अन्नकूट पर्व दीपावली के अगले दिन से मनाया जाता है और इसे गोवर्धन पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर गोकुलवासियों की रक्षा करने की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन भगवान को विविध व्यंजनों का अर्पण कर अन्न के महत्व और ईश्वर की कृपा के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।




