कभी अलविदा न कहना… किशोर कुमार की पुण्यतिथि पर सजी सुरों की महफिल

कुचामन सिटी के भारतीय संगीत सदन संस्थान में सोमवार देर रात मशहूर गायक, अभिनेता और संगीतकार किशोर कुमार की पुण्यतिथि पर “किशोर दा नाईट” नाम से संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन हुआ। शहर ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में संगीतप्रेमी इस आयोजन में शामिल हुए। कार्यक्रम में किशोर दा के सदाबहार गीतों की प्रस्तुति ने ऐसा माहौल बनाया कि पूरा सभागार सुरों और यादों की मिठास में डूब गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ किशोर कुमार को श्रद्धांजलि देकर किया गया। इसके बाद स्थानीय कलाकारों ने एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत किए। ‘कभी अलविदा न कहना’, ‘सारा ज़माना हसीनों का दीवाना’, ‘पल पल दिल के पास तुम रहती हो’ जैसे गीतों की प्रस्तुति पर दर्शक झूम उठे। हर गीत के साथ किशोर दा की जादुई आवाज़ की यादें ताज़ा हो उठीं और दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम में नवरत्न गुंद ने ‘ये लाल रंग’, सुरेन्द्र जेठलिया ने ‘मेरे दिल ने तड़प के’, संदीप कोशिक ने ‘ये शाम मस्तानी’, लवानी सिंह ने ‘मेरे दीवानेपन की’, भानु प्रकाश ने ‘रूप तेरा मस्ताना’, प्रकाश दाधिच ने ‘तेरे जैसा यार कहाँ’, पत्रकार ओम प्रकाश कुमावत ने ‘घुंघरू की तरह’, मनोज भारद्वाज ने ‘लोग कहते हैं मैं शराबी हूँ’, महेन्द्र मिश्रा ने ‘दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ दिया’, ट्विंकल ने ‘आपकी आँखों में कुछ’, कनिका ने ‘फूलों के रंग से’, निकिता ने ‘ज़िंदगी प्यार का गीत है’, वसुंधरा ने ‘तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा नहीं’ और मोहम्मद असलम ने ‘तुझे बेबसी ने मारा’ जैसे अमर गीतों से माहौल को भावनात्मक बना दिया।

भारतीय संगीत सदन के सदस्य महेन्द्र मिश्रा ने बताया कि किशोर कुमार जैसे बहुमुखी कलाकार सदियों में एक बार जन्म लेते हैं। उनकी आवाज़ और अदाकारी आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। यह आयोजन उनके प्रति सम्मान और प्रेम की भावना से प्रेरित होकर किया गया।

संस्थान के अध्यक्ष शिव कुमार अग्रवाल ने कहा कि किशोर कुमार की गायकी भारतीय संगीत की आत्मा है, और उनका हर गीत आज भी उतना ही ताज़ा लगता है जितना दशकों पहले था।

क्लासीपोलिटन के सीईओ जीतेन्द्र कुमावत, जिनके सौजन्य से यह कार्यक्रम आयोजित हुआ, ने कहा कि “किशोर दा के गीत जीवन के हर रंग को बखूबी बयां करते हैं। उनकी आवाज़ में जादू है, जो हर पीढ़ी को जोड़ता है।”

वहीं, संस्थान के वरिष्ठ सदस्य बंशी लाल कांसोटिया ने कहा कि “संगीत सदन का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के माध्यम से अमर कलाकारों की यादों को जीवित रखना और नई पीढ़ी को भारतीय संगीत से जोड़ना है।”

कार्यक्रम में शिवकुमार अग्रवाल, सुनील माथुर, मुरारी गौड़, प्रदीप आचार्य, रविकांत शर्मा, घनश्याम गौड़, बंशी लाल कांसोटिया, प्रकाश शर्मा, ओमप्रकाश कुमावत, विमल पारीक, भानु प्रकाश ओदित्य, आरती सर्वा, प्रकाश सर्वा, प्रभात प्रधान, अनिल कुमार माथुर, रमेश चावला, मुकेश राजपुरोहित, युसूफ भाटी, महेंद्र लाटा, मनोहर पारीक, रामनिवास कुमावत और प्यारेलाल कुमावत सहित अनेक संगीत प्रेमी मौजूद रहे।

रात्रि के अंतिम गीत ‘कभी अलविदा न कहना’ के साथ पूरा माहौल भावनाओं से भर गया। दर्शकों ने मोमबत्तियाँ जलाकर और तालियों की गूंज के बीच किशोर दा को नमन किया।नकार्यक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि “कभी अलविदा न कहना” केवल एक गीत नहीं, बल्कि एक भावना है — जो इस महान कलाकार को आज भी हमारे दिलों में जीवित रखती है।

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