अंतरराष्ट्रीय ई–कचरा दिवस के मौके पर शिक्षा नगरी कुचामन सिटी में सामाजिक संस्था लॉयन्स क्लब कुचामन फोर्ट ने शहर वासियों को ई–कचरे से बढ़ते खतरे के प्रति जागरूक किया। इस अवसर पर क्लब के संस्थापक अध्यक्ष लॉयन राम काबरा और पूर्व सचिव लॉयन रचित नंदवाना ने लोगों को बताया कि आज के दौर में हर घर में मौजूद खराब इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं — जैसे प्लग, तार, मोबाइल, चार्जर, रिमोट, कम्प्यूटर और अन्य उपकरण — धीरे–धीरे पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही हैं।

लॉयन राम काबरा ने कहा कि ई–कचरा एक “मूक प्रदूषक” है, जो बिना आवाज किए हवा, पानी और मिट्टी में जहर घोल रहा है। इसमें मौजूद सीसा, पारा, क्रोमियम और अन्य हानिकारक रसायन धीरे–धीरे हमारे वातावरण में घुलकर न केवल मूक प्राणियों के जीवन के लिए खतरनाक हैं बल्कि मनुष्य के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ई–कचरे से निकलने वाले रासायनिक तत्व फसलों की गुणवत्ता घटा रहे हैं, जलस्रोतों को दूषित कर रहे हैं और श्वसन व त्वचा रोग जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म दे रहे हैं।

काबरा ने लोगों से अपील की कि वे अपने पुराने या खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सड़क या कूड़ेदान में न फेंकें, बल्कि उन्हें रीसायकल करने वाली अधिकृत कंपनियों को दें ताकि उनसे पुनः उपयोग योग्य सामग्री प्राप्त की जा सके। उन्होंने कहा कि “ई–कचरा मुक्त भारत” बनाने का लक्ष्य तभी संभव है जब आमजन इस दिशा में जिम्मेदारी दिखाएं। उन्होंने बताया कि लॉयन्स क्लब कुचामन फोर्ट ने इसके लिए स्थानीय स्तर पर पहल की है — शहरवासी अपना ई–वेस्ट पुराने बस स्टैंड स्थित अन्नपूर्णा रसोई पर जमा करवा सकते हैं, जहां से इसे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से उचित तरीके से निस्तारित किया जाएगा।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि ई–कचरा आज एक अदृश्य संकट बन चुका है और इसे रोकना हर नागरिक का दायित्व है। पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि हम तकनीकी विकास के साथ-साथ उसके दुष्प्रभावों के प्रति भी जागरूक रहें।
