शेरानी आबाद में 18 दिन चला नि:शुल्क मोतियाबिन्द ऑपरेशन और लेंस प्रत्यारोपण शिविर, 657 की हुई जांच, 55 का सफल ऑपरेशन

शेरानी आबाद में 18 दिन चला नि:शुल्क मोतियाबिन्द ऑपरेशन और लेंस प्रत्यारोपण शिविर, 657 की हुई जांच, 55 का सफल ऑपरेशन

पैग़म्बर-ए-इस्लाम ﷺ के 1500वें जन्म दिवस पर हुआ सेवा का आयोजन

शेरानी आबाद कस्बे में 7 से 24 सितम्बर 2025 तक पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद ﷺ के 1500वें जन्म दिवस के मौके पर नि:शुल्क मोतियाबिन्द ऑपरेशन एवं लैंस प्रत्यारोपण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का आयोजन सुन्नी तब्लीगी जमाअत शिक्षण संस्थान के सहयोग से शेरानी जमाअत खाना में किया गया।

ओपीडी में 800 पंजीकरण, 657 की जांच

मौलाना मोहम्मद हनीफ रिज़वी ने बताया कि शिविर की शुरुआत 7 सितम्बर को ओपीडी से हुई, जिसमें 800 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ। इनमें से 657 मरीजों की आंखों की जांच की गई और जरूरतमंदों को दवाइयां नि:शुल्क दी गईं। रोजाना 10 से 20 मरीजों को डीडवाना ले जाकर ऑपरेशन करवाए गए।

आधुनिक तकनीक से हुए ऑपरेशन

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. इंसाफ अली और डॉ. संदीप शिवरान (नोबल आई हॉस्पिटल डीडवाना) की टीम ने मरीजों की जांच की। 125 मरीजों को ऑपरेशन के लिए चयनित किया गया, जिनमें से 55 मरीजों की फेंको सर्जरी और टेरिजियम सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। मरीजों को मुफ्त चश्मे और दवाइयां भी उपलब्ध कराई गईं।

शिविर में दी गई विशेष सुविधाएं

शिविर में अत्याधुनिक तकनीक से बिना सुई और टांके के अमेरिकन फेको मशीन द्वारा मोतियाबिन्द का ऑपरेशन किया गया। जापानी मशीन से नजर और चश्मे की जांच की गई, वहीं ऑटोग्राफ्ट तकनीक से टेरिजियम (नाखुने) का ऑपरेशन हुआ। आंखों की झिल्ली की सफाई YAG लेजर तकनीक से की गई और आंखों के प्रेशर की जांच NCT मशीन से की गई। इसके अलावा काला पानी (ग्लूकोमा), स्क्विंट (आंखों का टेढ़ापन), बीपी और शुगर की भी नि:शुल्क जांच व उपचार उपलब्ध कराया गया।

जानिए, क्या होती हैं टेरिजियम सर्जरी?

आयोजन समिति से जुड़े अशरफ पठान ने बताया कि इस शिविर में टेरिजियम सर्जरी भी की गई, जो आंख में बढ़ने वाले गैर-कैंसर कंजंक्टिवा ग्रोथ को हटाने के लिए होती है। यह समस्या धूल, धूप और हवा के लगातार संपर्क में रहने वालों में अधिक पाई जाती है और गंभीर स्थिति में कॉर्निया को ढककर दृष्टि को पूरी तरह प्रभावित कर सकती है।पठान ने बताया कि इस सर्जरी से मरीजों को बेहतर दृष्टि, लालिमा और बेचैनी से राहत मिलती है और जीवन सामान्य जैसा हो जाता है।

मरीजों को तुरंत मिली छुट्टी

सभी ऑपरेशन आधुनिक तकनीक से किए गए, जिनमें न इंजेक्शन की जरूरत पड़ी, न टांके और न ही पट्टी। मरीजों को हाथों-हाथ छुट्टी दे दी गई।

समाजसेवियों का सहयोग

शिविर को सफल बनाने में अशरफ पठान (पूर्व सरपंच), नर्सिंग ऑफिसर उमर फारुक, मौलाना प्यार मोहम्मद और हाफिज अशरफ सहित कई लोगों ने सहयोग दिया।

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