कानपुर की घटना के विरोध में नावां में उठी आवाज़, ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टरों के साथ हुआ शांतिपूर्ण प्रदर्शन

नावां : उत्तरप्रदेश के कानपुर में ईद मिलादुन्नबी के जुलूस के दौरान लगाए गए ‘आई लव मोहम्मद’ बैनर-पोस्टरों को लेकर उपजे विवाद और उसके बाद हुए उपद्रव ने देशभर में आक्रोश फैला दिया है। कानपुर में जहां असामाजिक तत्वों ने उपद्रव किया, वहीं पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई उपद्रवियों पर करने के बजाय मुस्लिम समाज के युवाओं पर एफआईआर दर्ज कर दी। इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ उत्तरप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

इसी क्रम में मंगलवार शाम को नावां की जामा मस्जिद के पास मुस्लिम समाज के लोगों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे बैनर-पोस्टर लेकर संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की मांग उठाई।

कायमखानी युवा सोसायटी के अध्यक्ष अमजद खान और महासचिव अशफाक खान ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(क) हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, वहीं अनुच्छेद 25 से 28 तक धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भी सुनिश्चित करता है। लेकिन कानपुर पुलिस की कार्रवाई संविधान द्वारा प्रदत्त इन मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।

इस अवसर पर जामा मस्जिद सदर रशीद शेख ने कहा कि पैग़म्बर मोहम्मद साहब से जुड़ा प्यार और सम्मान हर मुसलमान की आस्था का हिस्सा है, और ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे पोस्टर लगाना किसी भी तरह से अपराध नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में हो रहे विरोध इस बात का प्रमाण हैं कि लोग अब अपने अधिकारों को लेकर जागरूक और संवेदनशील हो रहे हैं। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे निष्पक्ष होकर वास्तविक उपद्रवियों पर कार्रवाई करें, न कि बेगुनाह युवाओं को निशाना बनाएं।

विरोध प्रदर्शन के दौरान जामा मस्जिद के ईमाम मौलाना असलम साहब, सदर रशीद शेख, भंवरु खां, शौकत खां, इरफान खां, रहमत अली, मोहम्मद सद्दीक, जावेद खान, उस्मान अली, भुरू भाई, बबलू कायमखानी, सलीम खान, जाफर अली, सज्जाद खान, मकसूद अली सहित बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

नावां में हुआ यह विरोध, देशभर में चल रहे उन प्रदर्शनों की कड़ी है जिनमें लोग संविधान की रक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता बनाए रखने की मांग कर रहे हैं।

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