समता सैनिक दल तहसील शाखा मकराना के तत्वावधान में बुधवार को बूडसू स्थित गंगा माई मंदिर प्रांगण में बोधिसत्व अनागरिक धम्म पाल तथा “सच्ची रामायण” के लेखक और समाज सुधारक ई.वी. रामास्वामी नायकर पेरियार की जयंती धूमधाम से मनाई गई। समारोह में बड़ी संख्या में समता सैनिक दल के कार्यकर्ता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

समारोह का शुभारंभ महापुरुषों के चित्र पर पुष्पांजलि एवं माल्यार्पण के साथ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समता सैनिक दल राजस्थान के प्रदेश महासचिव ओमप्रकाश कांसोटिया थे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ सैनिक सुरेश मेघवाल चावण्डिया ने की।
अनागरिक धम्म पाल की प्रेरक गाथा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओमप्रकाश कांसोटिया ने अनागरिक धम्म पाल के जीवन की जानकारी देते हुए कहा कि 1891 में जब वे बोधगया आए तो महाबोधि विहार और अन्य बौद्ध स्थलों की दुर्दशा देखकर बेहद दुखी हुए। उन्होंने देखा कि वहां अन्य धर्मों का कब्ज़ा और कर्मकांड का बोलबाला है। इस स्थिति से व्यथित होकर उन्होंने बौद्ध धरोहरों को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया।

उन्होंने महाबोधि सोसाइटी की स्थापना की, जिसका कार्यालय कोलंबो से कोलकाता लाया गया। पूरी दुनिया को भारत के बौद्ध स्थलों की दयनीय स्थिति से अवगत कराया और अपने अथक प्रयासों से बौद्धों को महाबोधि विहार में प्रवेश दिलवाया। लगभग 40 वर्षों तक धम्म पाल ने भारत सहित यूरोप और अमेरिका में करुणा और मैत्री के धम्म का प्रचार-प्रसार किया।
पेरियार के क्रांतिकारी विचार
कार्यक्रम में कांसोटिया ने पेरियार ई.वी. रामास्वामी नायकर के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि पेरियार धार्मिक आडंबर और कर्मकांडों पर गहरी चोट करने वाले क्रांतिकारी विचारक थे। तमिलनाडु में उन्होंने ब्राह्मणवादी प्रभुत्व और जातिगत अस्पृश्यता के खिलाफ खुलकर विद्रोह किया। समाज सुधार और सामाजिक न्याय की राह दिखाते हुए उन्होंने “सच्ची रामायण” की रचना की, जो व्यापक रूप से प्रचारित हुई और आज भी प्रासंगिक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुरेश मेघवाल चावण्डिया ने समता सैनिक दल की विचारधारा और संगठनात्मक भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पेरियार और अनागरिक धम्म पाल के जीवन और उनके संघर्षों को वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
इस अवसर पर गोविंद राम बौद्ध, बंसीलाल बडारिया, राजेंद्र मेहरा उचेरिया, शीशपाल गोसाईवाल और भंवरलाल लूना पेंटर ने दोनों महापुरुषों की मूल विचारधारा पर अपने विचार रखते हुए समाज में समता, समानता और न्याय की आवश्यकता पर बल दिया।

जयंती समारोह में प्रकाश बलिया बरवाला, देवीलाल गूंगलिया, लोकेश बडारिया, श्रवण आसोपिया, किशनलाल आसोपिया, विक्रम सुवासिया, संदीप गुसाईवाल, अभिषेक गोसाईवाल, राजूराम सुवावासिया (पुलिस अधिकारी), किशनलाल गहलोत सहित कई सैनिक एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
समारोह में मौजूद सभी लोगों ने संकल्प लिया कि महापुरुषों की विचारधारा को समाज में जीवित रखने के लिए कार्य करते रहेंगे।
