कुचामन सिटी नगर परिषद में सभापति परिवर्तन को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच उपसभापति रहे हेमराज चावला ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रेस बयान जारी कर उन्होंने कहा कि “मेरे द्वारा सरकारी भूमि का पट्टा बनाने का आरोप पूरी तरह से निराधार, तथ्यहीन और राजनीतिक षड़यंत्र का हिस्सा है।”

“पुश्तैनी भूमि को बताया नगरपालिका की जमीन”
चावला ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर विवाद खड़ा किया गया है, वह उनके पूर्वजों की पुश्तैनी पट्टाशुद भूमि है और उनके मकान की चारदीवारी के भीतर स्थित मात्र 8 फीट भूमि है। उन्होंने कहा कि इस भूमि का फ्रीहोल्ड पट्टा बनाने के लिए उन्होंने नियमित शुल्क भी जमा कराया था, न कि किसी प्रकार की चोरी की।– उन्होंने सवाल उठाया कि “जब यह मेरी पुश्तैनी भूमि है, तो यह नगरपालिका की कैसे हो सकती है?”

“कार्मिकों की गलती, मुझे आरोपी क्यों?”
पूर्व उपसभापति ने आरोप लगाया कि नगरपालिका के तकनीकी अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार यह भूमि ‘मिश्रित भू-उपयोग’ श्रेणी में आती है। फिर भी मनमाने ढंग से व्यावसायिक पट्टा जारी करने में दोषी कार्मिकों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि उन्हें ही कटघरे में खड़ा कर दिया गया। उन्होंने कहा, “पट्टा जारी करने में कहीं भी मेरे हस्ताक्षर नहीं होते और न ही यह मेरे पदीय अधिकार में आता है। ऐसे में पद के दुरुपयोग का सवाल ही नहीं उठता।”

“सभापति-उपसभापति दोनों को हटाने की साजिश”
चावला ने कहा कि यदि झूठी शिकायतों के आधार पर सभापति को निलंबित किया जाता है तो कानून के अनुसार कार्यभार उपसभापति को सौंपना पड़ता। लेकिन सत्ता की मंशा दोनों पद भाजपा के हाथों में देने की थी, इसलिए एक सुनियोजित षड़यंत्र के तहत भाजपा पदाधिकारी से ही मेरे खिलाफ शिकायत कराई गई।

“यदि गलत हूँ तो संवैधानिक रास्ता अपनाओ”
चावला ने चुनौती दी कि यदि उन्होंने वास्तव में कोई असंवैधानिक कार्य किया है तो सत्ता पक्ष अविश्वास प्रस्ताव या महाभियोग प्रस्ताव लाकर उन्हें हटाए, न कि झूठे आरोप लगाकर बदनाम करने की कोशिश करे। उन्होंने कहा कि वे बहुमत से निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और जनता का विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
