आगामी 21 दिसंबर को प्रस्तावित वर्ष 2025 की चतुर्थ और अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन को लेकर गुरुवार को पुलिस अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष, तालुका विधिक सेवा समिति एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुन्दर लाल खारोल ने की।

यह बैठक राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर तथा अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश, डीडवाना नाहर सिंह मीणा के निर्देशन में आयोजित हुई। बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विमल नेहरा, उप-पुलिस अधीक्षक मुकेश चौधरी, थानाधिकारी कुचामन सतपाल मीणा, थानाधिकारी चितावा तेजाराम, थानाधिकारी नावां नन्दकिशोर तथा थानाधिकारी मारोठ बद्रीप्रसाद उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए न्यायाधीश सुन्दर लाल खारोल ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय पाने का सरल, त्वरित और सुलभ माध्यम है, जिससे आमजन को वर्षों से लंबित मामलों से राहत मिलती है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों के निस्तारण के उद्देश्य से मोटरयान दुर्घटना दावा अधिकरण, धारा 138 एनआई एक्ट, तथा वैवाहिक प्रकरणों में पक्षकारों को जारी नोटिस की समयबद्ध और सुनिश्चित तामील कराई जाए, ताकि लोक अदालत का अधिकतम लाभ आमजन तक पहुंच सके।
न्यायाधीश खारोल ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस और न्यायिक तंत्र के आपसी समन्वय से ही लोक अदालत को सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि “लोक अदालत केवल मामलों के निस्तारण का मंच नहीं, बल्कि समाज में सौहार्द, समझौते और विश्वास को मजबूत करने का माध्यम है।”
बैठक में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित ‘जागृति’ इकाई के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। न्यायाधीश खारोल ने कहा कि जागृति इकाई के सदस्य के रूप में थानाधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में विधिक जागरूकता शिविरों का आयोजन करें और आमजन को बाल-विवाह की रोकथाम, साइबर अपराध से बचाव, सामाजिक कुरीतियों तथा प्रचलित विधिक कानूनों की जानकारी दें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि इन कार्यक्रमों की रिपोर्ट समय पर संबंधित प्राधिकरण को प्रेषित की जाए।

बैठक के दौरान बाल-वाहिनियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीरता से चर्चा की गई। न्यायाधीश सुन्दर लाल खारोल ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और उनकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने निर्देश दिए कि सरकारी एवं निजी विद्यालयों द्वारा संचालित बाल-वाहिनियों का संचालन माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हो, उनका त्वरित निरीक्षण किया जाए तथा निरीक्षण रिपोर्ट नियमानुसार प्रस्तुत की जाए।
न्यायाधीश खारोल ने सभी पुलिस अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे लोक अदालत की भावना के अनुरूप कार्य करते हुए आमजन को त्वरित न्याय दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे, जिससे 21 दिसंबर 2025 को आयोजित होने वाली चतुर्थ राष्ट्रीय लोक अदालत पूर्ण रूप से सफल हो सके।
