थेबडी में ग्रामीण सेवा शिविर बना न्याय और राहत का प्रतीक — राजस्व रिकॉर्ड में हुई ऐतिहासिक शुद्धि, 17 राजपूत बने ब्राह्मण, परिवारों के चेहरों पर लौटी मुस्कान
डीडवाना – कुचामन जिले की ग्राम पंचायत थेबडी में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर शनिवार को कई परिवारों के लिए नई सुबह लेकर आया। लंबे समय से राजस्व रिकॉर्ड की गलती से जूझ रहे परिवारों को आखिरकार अपनी वास्तविक पहचान और न्याय मिल गया।

शिविर के दौरान नेमीचंद पुत्र पृथ्वीराज ने तहसीलदार छोटी खाटू नृसिंह चारण को एक आवेदन सौंपते हुए बताया कि राजस्व विभाग में सेग्रीगेशन प्रक्रिया के दौरान उनके परिवार की जाति राजपूत दर्ज हो गई थी, जबकि वे मूलतः ब्राह्मण हैं। आवेदन मिलते ही तहसीलदार ने तत्परता दिखाते हुए पटवारी हल्का थेबडी को नियम 166 के तहत रिकॉर्ड की जांच कर सुधार की कार्रवाई के निर्देश दिए। आदेश मिलते ही पटवारी ईश्वर बोयल और भू-अभिलेख निरीक्षक अर्जुनराम गहलोत ने राजस्व अभिलेखों की गहन जांच शुरू की और रिकॉर्ड में दर्ज गलत प्रविष्टियों को सुधारा।
संपूर्ण प्रक्रिया के बाद 17 खातेदारों की जाति को राजपूत से शुद्ध कर ब्राह्मण दर्ज किया गया। यही नहीं, शिविर में अन्य मामलों में भी सुधार करते हुए कुल 25 शुद्धियां पूरी की गईं। इससे पहले तक इन परिवारों को राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था, क्योंकि जाति रिकॉर्ड की गलती के कारण उनके आवेदन खारिज हो जाते थे। अब इन परिवारों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक योजनाओं का रास्ता खुल गया है।

सुधार के बाद प्रभावित परिवारों ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह दिन उनके लिए किसी पर्व से कम नहीं है। उन्होंने जिला कलेक्टर डॉ. महेंद्र खड़गावत, राज्य सरकार और प्रशासन का आभार जताया।
जिला कलेक्टर डॉ. महेंद्र खड़गावत ने इस सफलता पर कहा कि यह शिविर प्रशासन की संवेदनशीलता और जनसेवा की सच्ची मिसाल है। उन्होंने कहा कि “राजस्व रिकॉर्ड की शुद्धता केवल एक दस्तावेजी सुधार नहीं, बल्कि नागरिक की पहचान और उसके अधिकार से जुड़ा विषय है। जिस तत्परता और निष्पक्षता से यह सुधार हुआ है, वह पूरे जिले के लिए प्रेरक उदाहरण है।” उन्होंने तहसीलदार, पटवारी और भू-अभिलेख विभाग की टीम की सराहना करते हुए कहा कि सेवा शिविर अब सिर्फ औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि जनसुनवाई और समस्या समाधान का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं।

थेबडी सेवा शिविर की यह सफलता न केवल प्रशासनिक दक्षता की कहानी कहती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि शासन और जनता के बीच विश्वास की डोर तब मजबूत होती है जब तंत्र वास्तव में संवेदनशीलता से काम करता है।
