डीडवाना – कुचामन जिले के जसवंतगढ़ थाना क्षेत्र में आज सुबह हुआ भीषण हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई । ये हादसा पीड़ित परिवारों की खुशियाँ ही नहीं लूट कर ले गया, बल्कि समाज को यह सोचने पर भी मजबूर कर गया कि आखिर सड़क हादसों से बचने के लिए हम कब तक सिर्फ अफसोस करते रहेंगे। गौवंश के अचानक सड़क पर आ जाने से यह दुर्घटना घटी, लेकिन यह पहला मामला नहीं है। आए दिन जिले और प्रदेश में ऐसे हादसे हो रहे हैं, जिनमें अनगिनत निर्दोष लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं। सवाल यह है कि क्या अब भी हम चुप बैठें या कोई ठोस कदम उठाएँ?
पुलिस व प्रशासन की भूमिका
पुलिस और प्रशासन की सबसे पहली जिम्मेदारी है कि हाईवे और मुख्य सड़कों पर उन इलाकों की पहचान करनी होगी जहां अक्सर पशु सड़क पर आ जाते हैं। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर वार्निंग साइनबोर्ड, स्पीड ब्रेकर और रिफ्लेक्टर लगाए जाएँ ताकि चालक सतर्क रह सकें।
जिला कलेक्टर डॉक्टर महेंद्र खड़गावत और जिला पुलिस अधीक्षक ऋचा तोमर चाहें तो एक विशेष “सड़क सुरक्षा एवं गोवंश संरक्षण अभियान” की शुरुआत कर सकते हैं, जिसमें पशुओं को सड़क पर खुला छोड़ने वाले लोगों पर सख्ती हो और दुर्घटना रोकने के ठोस उपाय लागू किए जाएँ।जिले में लावारिस और निराश्रित गौवंश एक बड़ी समस्या है । इसका स्थाई समाधान कर हम कई समस्याओं से छुटकारा पा सकता है । जरूरत है तो बस मजबूत इच्छा शक्ति और समर्पित भाव की ।
आमजन की जिम्मेदारी
सिर्फ प्रशासन पर छोड़ देने से काम नहीं चलेगा। आम जनता को भी अपनी भागीदारी निभानी होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने पशुओं को सड़क पर खुला छोड़ देते हैं। यह आदत बदलनी होगी।
जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को समझाना होगा कि एक लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी ला सकती है।
समाजसेवी संस्थाएँ “गोसेवा” के साथ-साथ “गोसंरक्षण” की भी पहल करें, ताकि मवेशी सड़क पर भटकने की बजाय सुरक्षित स्थान पर रहें।
एक महाअभियान की ज़रूरत
यदि जिला प्रशासन और पुलिस मिलकर एक “सुरक्षित सड़क – सुरक्षित जीवन” महाअभियान चलाएँ, जिसमें
सड़क किनारे पशुओं के लिए सुरक्षित बाड़े, या नंदी शाला
एनजीओ और गौशालाओं की सक्रिय भूमिका,
चालकों के लिए सुरक्षा प्रशिक्षण,
और नागरिकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम
जैसे कदम उठाए जाएँ, तो यकीनन आने वाले समय में ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
यह केवल हादसे की प्रतिक्रिया नहीं बल्कि भविष्य के लिए चेतावनी है। अगर हम सब मिलकर जिम्मेदारी समझें, तो सड़कों पर होने वाली कई अनचाही मौतों को टाला जा सकता है।
