जाँच कार्यों के निजीकरण के विरोध में उबाल : डीडवाना पहुँचे जिलेभर के आक्रोशित लैब टेक्नीशियन, सौंपा ज्ञापन

प्रदेशभर के लैब टेक्नीशियन इन दिनों गुस्से में हैं। राजस्थान सरकार द्वारा जांच कार्यों को हब एंड स्पोक मॉडल के तहत निजी हाथों में सौंपे जाने के फैसले के विरोध में सोमवार को जिलेभर के लैब टेक्नीशियन डीडवाना-कुचामन जिला कलेक्ट्रेट पहुँचे और अखिल राजस्थान लैबोरेट्री टेक्नीशियन कर्मचारी संघ के बैनर तले अतिरिक्त जिला कलेक्टर (मुख्यालय) महेन्द्र मीणा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

सरकारी योजना को मिली थी विश्वस्तरीय पहचान

संघ के जिला अध्यक्ष अमरीश माथुर एवं जिला संयोजक हनुमान प्रसाद एस.टी.ए. ने बताया कि प्रदेश के लैब टेक्नीशियनों ने दिन-रात मेहनत करके राजस्थान सरकार की निशुल्क जांच योजना को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलवाई। इस योजना की सफलता से प्रभावित होकर पूरे देश से चिकित्सा क्षेत्र के आला अधिकारी राजस्थान पहुंचे थे और कई राज्यों ने राजस्थान की तर्ज पर योजनाएं लागू कीं।

लेकिन अब सरकार द्वारा जांच कार्यों को निजी कंपनियों को सौंपने से न केवल लैब टेक्नीशियन संवर्ग का भविष्य अंधकारमय हो रहा है बल्कि आमजन को गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय रिपोर्ट मिलने पर भी संदेह पैदा हो गया है।

सरकारी संसाधन पर्याप्त, फिर क्यों निजीकरण?

नेताओं ने सवाल उठाया कि जिन जांचों को निजी हाथों में सौंपा गया है, उनके लिए प्रदेश सरकार के पास पर्याप्त मानव संसाधन व मशीनें मौजूद हैं। इसके बावजूद निजी कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए ऐसा निर्णय लिया गया, जिससे पूरे संवर्ग को गर्त में धकेलने की कोशिश हो रही है।

हब एंड स्पोक मॉडल की असफलता

लैब टेक्नीशियनों का कहना है कि हब एंड स्पोक मॉडल पहले ही कई राज्यों में फेल साबित हो चुका है, जबकि राजस्थान की 12 साल पुरानी निशुल्क जांच योजना पूरी तरह से सफल रही है। इस नए मॉडल से न केवल सरकारी क्षेत्र में लैब टेक्नीशियन कैडर समाप्त हो जाएगा बल्कि युवाओं में बेरोजगारी भी बढ़ेगी।

सरकार को कड़ी चेतावनी

संघ ने साफ कहा कि यदि सरकार ने 10 दिनों में सकारात्मक कार्रवाई नहीं की, तो इस विरोध को मजबूरन आंदोलन का रूप दिया जाएगा।

ये रहें मौजूद

ज्ञापन देने के दौरान कैलाश डोंगीवाल, मो. रशीद, निर्मल कुमावत, अनिल मील, धर्मेन्द्र चौधरी, प्रकाश भदलिया सहित कई लैब टेक्नीशियन मौजूद रहे।

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